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क्रिकेट में भी कला

चंडीगढ़.उन्हें भाता है पीला और हरा रंग। कहती हैं ये दोनों रंग ताजगी और सकारात्मकता लिए हैं अपने आप में। डॉ. पुष्पा द्रविड़ इन्हीं रंगों की 36 पेंटिंग्स लेकर पहुंची हैं शहर में। पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ की मां डॉ. पुष्पा द्रविड़ के साथ उनके पति शरद द्रविड़ भी आए हैं।

एग्जीबिशन से पहले डॉ. पुष्पा द्रविड़ ने बताया कि कैसे रंगों और कलात्मकता के साथ क्रिकेट आ मिला और बंगलौर के क्रिकेट स्टेडियम में एक इतिहास रचा गया-

मैं चालीस फीट ऊंचा म्युरल फिक्स कर रही थी और वहां से गुजरता क्रिकेटर से लेकर आम आदमी तक खड़ा होकर मुझे देखता था। इस काम में 29 दिन लगे। एक आर्टिस्ट के नाते मैं इसलिए खुश थी क्योंकि क्रिकेटर्स को समर्पित यह म्युरल हमेशा वहां रहेगा और एक मां के तौर पर मेरे लिए सबसे खुशी की बात ये थी कि इस सीरीज में राहुल भी शामिल था।

पुष्पा इन दिनों इसी सीरीज का दूसरा भाग तैयार करने में व्यस्त हैं। इसमें चार क्रिकेटर्स को शामिल किया गया है। पहली सीरीज में उन्होंने अनिल कुंबले, श्रीनाथ, बृजेश पटेल, सैयद किरमानी, चंद्रशेखर और राहुल द्रविड़ को शामिल किया था।पुष्पा इस सीरीज के बारे में बात करते हुए टैराकोटा और फाइबर ग्लास के मीडियम से बहुत आगे निकल आती हैं जहां कभी एक आर्टिस्ट अपनी कला के अमर नमूने पर बात करता दिखता है तो कभी एक मां अपनी आंखों में पूरी ममता लेकर बेटे के फन की तारीफ करती दिखती है।

कैसा रहा क्रिकेटर्स का रिस्पॉन्स इस पर? वे बताती हैं-सब बहुत खुश थे। मैंने कोशिश की है कि मैं इन सभी स्टार्स को उनकी ओरिजनेलिटी के साथ पेश कर सकूं जिससे सौ साल बाद भी कोई उन्हें देखे तो कहे कि अच्छा ऐसे दिखते थे ये लोग..।

पुष्पा ऐसी आर्टिस्ट हैं जो अपनी कलात्मकता के जिक्र के साथ क्रिकेट के सिक्सर की एक्साइटमेंट को एक साथ बयान कर सकती हैं। वे अब से पहले शहर में राहुल द्रविड़ का मैच देखने आ चुकी हैं और यहां के आर्कीटेक्चर से बेहद प्रभावित हैं।

बंगलौर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ आर्कीटेक्चर में प्रोफेसर रहीं पुष्पा क्रिकेट में भी एक आर्ट देखती हैं। उन्हें इस बात से गुरेज नहीं है कि लोग क्रिकेट के बारे में उनसे बात करें, लेकिन यह भी चाहती हैं कि आर्टिस्ट को उसका सम्मान जरूर मिले। उन्होंने निकोलस रोरिक पर पीएचडी की है।

रोरिक के काम की रहस्यात्मकता को दिखाते नीले और परपल रंगों के मुकाबले वे अपने काम में नेचर से जुड़े हरे, पीले और भूरे रंगों का प्रयोग ज्यादा करती हैं। वे बताती हैं-हर आर्टिस्ट का अपना अलग अंदाज हो सकता है लेकिन मैं मानती हूं कि हर पेंटिंग या म्युरल ऐसा होना चाहिए जो सकारात्मक प्रभाव छोड़े। इसी सकारात्मकता का असर उनके पूरे काम पर दिखता है। पुष्पा की सीरीज प्रकृति-स्पंदन 2008 का उद्घाटन पंजाब आर्ट्स काउंसिल में 3 अप्रैल शाम 7.00 बजे होगा। एग्जीबिशन 8 अप्रैल तक देखी जा सकेगी।





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