वाशिंगटन.
धूम्रपान की लत और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ने के लिए जिम्मेदार है आनुवांशिक कारण। अमेरिका सहित तीन देशों के वैज्ञानिकों ने पूरे दावे के साथ कहा है कि उन्होंने इस आनुवंशिक कारण को सफलतापूर्वक चिह्नित कर लिया है।
फ्रांस, आइसलैंड और अमेरिका के वैज्ञानिकों नेक्रोमोसोम (गुणसूत्र)-15 के उन क्षेत्र में परिवर्तन को चिह्नित कर लिया है जो धूम्रपान करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा 70-80 फीसदी बढ़ा देते हैं। जिन लोगों में परिवर्तन वाले गुणसूत्र की एक प्रति भी होती है, उनमें फेफड़े के कैंसर का खतरा 28 फीसदी बढ़ जाता है। इन तीनों देशों के वैज्ञानिकों की टीम ने धूम्रपान करने वालों, धूम्रपान छोड़ने वालों और धूम्रपान न करने वाले हजारों लोगों को अपने अध्ययन में शामिल किया है।
सेंट लुइस स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में मनोरोग चिकित्सा की प्रोफेसर डा. लाउरा बेरट के मुताबिक यह अध्ययन बताता है कि धूम्रपान जनित दोष क्या हैं। धूम्रपान किस हद तक जैविक तौर पर आधारित है। सबसे उल्लेखनीय है कि तीनों देशों के वैज्ञानिकों ने गुणसूत्र-15 के ठीक एक ही क्षेत्र में परिवर्तन को चिह्नित किया, जहां तीन निकोटिन रिसेप्टर [ग्राही] जींस मौजूद होते हैं।
फ्रांस के लिओन स्थित इंटरनेशनल एजेंसी फार रिसर्च आन कैंसर के वैज्ञानिक पाल ब्रेनान का इस संबंध में कहना था- ताजा अध्ययन से तीनों निकोटिन ग्राही जींस को बंद कर देने जैसे इलाज की संभावना जगी है। अगर ऐसा हुआ तो फेफड़े के कैंसर और धूम्रपान की लत पर अंकुश का कारगर तरीका मिल जाएगा।
आइसलैंड की कंपनी डिकोड जेनेटिक्स ने दावा किया है कि उसके वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए हैं, जो संकेत देते हैं कि गुणसूत्र-15 में परिवर्तन के संवाहक तत्व ही निकोटिन की लत के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम का कहना है कि इस बात की ज्यादा संभावना है कि गुणसूत्र-15 में परिर्वतन का संबंध सीधे तौर पर तंबाकू से है, जो कैंसर का करण बनता है।