नई दिल्ली.
पुराने टाइपराइटर की जगह ले चुके कंप्यूटर के की-बोर्ड पर आप अधिक तेजी से हाथ चलाकर भले ही खुश होते हों, लेकिन सावधान हो जाइए, क्योंकि इस प्रक्रिया में आप स्नायुतंत्र की गड़बड़ी का शिकार हो सकते हैं। साथ ही नजर कमजोर होगी सो अलग। यह चेतावनी डाक्टरों ने दी है।
आधुनिक प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ ही अनेक प्रोफेशनल्स और छात्रों को मोटे-मोटे चश्मे लग रहे हैं, वहीं वे अंगुलियों के सुन्न होने और शोल्डर ब्लेड (कंधे की एक हड्डी) में दर्द का शिकार भी हो रहे हैं। डाक्टरों ने इसे ‘कार्पल टनल सिंड्रोम’ (सीटीएस) नाम दिया है।
न्यूयार्क में मर्सी हास्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व प्रमुख डा. विजयशील कुमार का कहना है कि स्क्रीन से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों जहां रेटिना को सूर्य की किरणों के बराबर क्षति पहुंचा सकती हैं, वहीं छोटे-छोटे की-बोर्ड पर अंगुलियों के तेजी से प्रहार की वजह से कुछ विशेष मामलों में हाथ हमेशा के लिए हिलना-डुलना बंद कर सकता है। उन्होंने कहा कि सीटीएस के तहत दर्द कलाई से शुरू होकर कंधे और नाक तक पहुंच जाता है।