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वेतन वृद्धि के लिए सांसदों को करना पड़ेगा इंतजार

नई दिल्ली. कैबिनेट ने सांसदों के वेतन वृद्धि संबंधी प्रस्ताव को अगली लोकसभा पर छोड़ दिया है। इस कारण सांसदों को वेतन में बढ़ोतरी के लिए कुछ और इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सांसदों के वेतन, भत्ते व अन्य लाभों पर विचार के लिए आयोग के गठन को मंजूरी मिलने की उम्मीद थी। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सांसदों के वेतन-भत्ते संबंधी 1954 के कानून में संशोधन कर एक स्थायी प्रणाली स्थापित की जानी है। ऐसी प्रणाली के अभाव में खुद के वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए सांसदों को सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ता है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल समाप्ति की ओर होने के कारण ही कैबिनेट ने सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला अगली लोकसभा पर छोड़ना बेहतर समझा।

वेतन से अधिक भत्ते : फिलहाल सांसदों को प्रतिमाह 16 हजार रुपए वेतन तथा 20 हजार रुपए निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के अलावा एक हजार रुपए का दैनिक भत्ता मिलता है। पूर्व सांसदों को प्रतिमाह छह हजार रुपए पेंशन मिलती है।

आईटीआईआर की स्थापना : कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर) स्थापित करने की नीति को मंजूरी दे दी है। ये क्षेत्र कम से कम 40 वर्ग किलोमीटर के होंगे।

आधिकारिक बयान के मुताबिक आईटीआईआर सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी विशेष आर्थिक क्षेत्रों से कही अधिक बड़े होंगे। इनमें न्यूनतम प्रोसेसिंग एरिया कुल क्षेत्रफल का 40 फीसदी होगा। इनमें आर्थिक क्षेत्र के अलावा सार्वजनिक सुविधाएं, रहवासी क्षेत्र, सामाजिक ढांचा और प्रशासनिक सेवा क्षेत्र भी होंगे ताकि शहरों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।

पीपीपी के जरिये होगा विकास : प्रस्ताव के मुताबिक जहां केंद्र आईटीआईआर के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग, एयरपोर्ट और रेल लिंक के विकास में मदद देगा, वहीं राज्य सरकारें बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और राज्यस्तरीय सड़कों जैसे स्थानीय ढांचे के विकास में मदद करेंगी। आईटीआईआर का विकास पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।





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