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उपभोक्ता कानून का उल्लंघन नहीं करता ‘रेड एंड व्हाइट’ का विज्ञापन

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक सिगरेट के एक विज्ञापन में अभिनेता अक्षय कुमार के ये शब्द कि ‘रेड एंड व्हाइट पीने वालों की बात ही कुछ और है’ उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन नहीं करते। कोर्ट ने इस संबंध में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का आदेश खारिज कर दिया।

हरियाणा के अजय कुमार ने आयोग से शिकायत की थी कि विज्ञापन से ऐसा संकेत मिलता है कि उस ब्रांड विशेष की सिगरेट पीने से फिल्म के सारे स्टंट सीन डुप्लीकेट की मदद के बिना किए जा सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि विज्ञापन के कारण सिगरेट के पैकेट पर लिखी वैधानिक चेतावनी का महत्व भी कम होता है।

आयोग ने विज्ञापन को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ करार देते हुए सिगरेट कंपनी गॉडफ्रे फिलिप इंडिया लिमिटेड को विज्ञापन तत्काल रोकने का आदेश देते हुए अखबारों में उसी आकार का संशोधित विज्ञापन प्रकाशित करने का आदेश दिया। इसके अलावा उसने 20 हजार रुपए का मुआवजा और शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपए कोर्ट खर्च देने को भी कहा।

इस आदेश के खिलाफ गॉडफ्रे की अपील स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरिजित पसायत व पी. सतशिवम की बेंच ने कहा कि अजय कुमार कंपनी कानून या अन्य किसी कानून के तहत पंजीबद्ध स्वैच्छिक उपभोक्ता संघ का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए उन्हें अनुचित व्यापार व्यवहार के बारे में शिकायत करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इसके लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 13 (6) के तहत जनहित याचिका दायर करने की अनुमति भी नहीं ली।

जजों ने कहा कि यह समझ से परे है कि आयोग ने यह शिकायत स्वीकार ही कैसे कर ली। कोर्ट के मुताबिक अजय कुमार ऐसा कोई सबूत नहीं दे पाए कि विज्ञापन अक्षय कुमार का था या अभिनेता स्टंट के कुछ सीन डुप्लीकेट के बिना कर सकते हैं।





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