कोलकाता.
आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाने वाला जंगली घास फूस डेंगू के मच्छरों को फैलने से रोक सकता है।
आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाने वाला यह जंगली घास फूस ‘सोलानम विलोसम’ नाइटशेड परिवार का सदस्य है। इस परिवार को चिकित्सीय गुणों के लिए खास तौर पर जाना जाता है।
पश्चिम बंगाल के बर्दवान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ‘सोलानम विलोसम’ का जूस बनाया और इसके इस्तेमाल के बाद पाया कि यह कई वायरसों को फैलने से रोकता है। इसमें डेंगू और पीलिया जसी बीमारियों के वायरस भी शामिल हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि सोलानम विलोसम खास तौर पर एस. एजीप्टी मच्छरों के लार्वा को खत्म करने में प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि यह कीटाणुनाशक मेलाथियन की तरह ताकतवर तो नहीं है पर पानी में मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अभी शोध पूरा नहीं हुआ है। शोधकर्ता गौतम चंद्रा ने कहा कि सोलानम विलोसम डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के खिलाफ गुणकारी होने के कारण महत्वपूर्ण है।
डेंगू के दायरे में दुनिया की 40 फीसदी जनसंख्या के आ जाने के कारण यह शोध खासा महत्व रखता है। अभी आयुर्वेद में और भी कई शोध किए जा रहे हैं, जिसमें कई पौधों में मच्छर विरोधी गुण पाए गए हैं।
गौरतलब है कि यह घास फूस जंगलों के अलावा बाग-बागीचों में भी स्वत: उग जाता है जिसे अवांछनीय भी माना जाता है।