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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
सीबीएसई पाठच्यक्रम से संचालित होने वाले स्कूल एक अप्रैल से खुल गए हंै। स्कूलों में पढ़ाई भी प्रारंभ हो चुकी है। इस बात का अंदाजा पुस्तक-कापियों की खरीदी के लिए शहर की पुस्तक दुकानों में लगी छात्रों व अभिभावकों की लंबी लाइन से ही लगाया जा सकता है।
सीबीएसई संचालित शहर के आठ स्कूलों डीपीएस, द जैन इंटरनेशनल, सेंट फ्रांसिस, डीएवी, महर्षि विद्या मंदिर, लोयला, सेंट जेवियर एवं ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में पढ़ाई का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। स्कूल जाने से पहले छात्र-छात्रओं की भीड़ आवश्यक पुस्तक-कापियों की खरीदी के लिए किताब दुकानों में नजर आ रही है। जिन घरों में सीबीएसई पाठच्यक्रम वाले स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे की संख्या एक है वहां तो पुस्तक-कापियों की खरीदी हो जा रही है, लेकिन एक से अधिक संख्या वाले घरों में इस खरीदी ने अभिभावकों की कमर ही तोड़ डाली है।
श्री बुक डिपो के संचालक पीयूष गुप्ता ने बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा महंगे प्रकाशनों की किताबें चलाई जा रहीं हंै, जिससे सीबीएसई पाठच्यक्रम पढ़ने वाले हर छात्र को महंगी किताबें ही खरीदनी पड़ रही है, जबकि बाजार में एनसीईआरटी की किताबें सस्ते दरों पर उपलब्ध हंै। इसके अलावा अभिभावकों को स्कूल प्रबंधनों द्वारा एक ही पुस्तक दुकान से पुस्तक खरीदी करने संबंधी बाध्यता भी परेशान कर रही है।
बिक जाएंगी पांच करोड़ की किताब-कापियां
किशोरी लाल मिश्रा पुस्तकालय के संचालक मुकेश मिश्रा ने बताया कि बीते वर्ष की तुलना में किताब-कापियों की कीमत में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। प्रायमरी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भी न्यूनतम 20 से 30 कापियां खरीदनी पड़ रही है। प्रायमरी स्तर के छात्रों की पुस्तक खरीदी 8 सौ से एक हजार, मिडिल स्कूल की खरीदी हजार से पंद्रह सौ एवं उससे ऊपर की कक्षाओं की खरीदी 15 सौ से 22 सौ रुपए में पूरी हो रही है।
जिससे सभी विषयों के किताब व कापी खरीदने में अभिभावकों का औसतन 15 सौ से 2 हजार रुपए की चपत लग रही है। शहर में सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या अनुमानित 25 हजार है। ऐसी स्थिति में पांच करोड़ रुपए की किताब-कापियां केवल सीबीएसई पाठच्यक्रम में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में ही खप जाएंगी।
किताब-कापियों का टोटा
सीबीएसई पाठच्यक्रम संचालित करने वाले स्कूल प्रबंधनों ने किताब-कापियों की खरीदी के लिए अलग-अलग पुस्तक दुकानों का चुनाव कर लिया है। छात्रों को उसी दुकान से किताब-कापियां खरीदने की बाध्यता है। संबंधित दुकान में किताबें नहीं मिलने की स्थिति में भी छात्र दूसरी दुकान से पुस्तक नहीं खरीद सकते। ऐसी स्थिति में कुछ दुकानों में बिक्री इतनी अधिक है कि वे अभिभावकों को पुस्तक-कापियां उपलब्ध नहीं कर पा रहे हंै।
लक्ष्मी टाकिज के पास स्थित पुस्तक भवन के संचालक ने बताया कि उनके पास पहली से आठवीं तक की किताबें अनुपलब्ध हैं। किताब-कापियां दिल्ली से आती हंै, जिससे आने में एक-दो दिनों का समय लग सकता है। किताब-कापयों की अनुपलब्धता से अभिभावकों को जहां परेशानी हो रही है, वहीं छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
अतिरिक्त राशि लौटाई
महर्षि स्कूल मंगला की किताब व कापियां जिस किताब दुकान से दी जा रही हैं। वहां अभिभावकों को 185 पेज की कापियां 24 के बजाए 30 रुपए में दी गई थी। इसी तरह 92 पेज की कापियां एक से दो रुपए अधिक में दी गई थी। स्कूल प्रबंधन द्वारा गुरुवार को सभी बच्चों को स्लिप जारी की गई, जिसमें किताब कापी की कीमत दर्ज थी। स्लिप दिखाने पर किताब दुकान संचालक द्वारा अभिभावकों से वसूल की गई अतिरिक्त राशि वापस करनी पड़ी।