जयपुर. राज्य की पांच झीलों के स्वरूप को निखारने का काम इसी साल शुरू हो जाएगा। झीलों के संरक्षण की इस परियोजना से राज्य में पर्यटन व्यवसाय बढ़ने की उम्मीद है। राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत अजमेर में अनासागर, पुष्कर सरोवर और माउंटआबू की नक्की झील की परियोजना को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। उदयपुर की पीछोला और फतहसागर झीलों की परियोजना को एक माह में मंजूरी मिल जाएगी।
इस योजना के तहत झीलों का सौंदर्यीकरण होगा, साथ ही आसपास अतिक्रमण को भी रोका जा सकेगा। झीलों के कैचमेंट एरिया का संरक्षण होने से बारिश का पानी झीलों में आ सकेगा। करोड़ों रुपए की इन परियोजनाओं से क्षेत्र के श्रमिकों को रोजगार मिलेगा और सौंदर्यीकरण के बाद ये झीलें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकेंगी।
स्वायत्त शासन विभाग के सचिव मनजीतसिंह ने बताया कि अजमेर में अनासागर, पुष्कर सरोवर व माउंट आबू में नक्की झील की परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। उदयपुर की पीछोला व फतहसागर झील संरक्षण परियोजना को शीघ्र ही मंजूरी मिलने वाली है। इसमें 70 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 30 प्रतिशत राज्य सरकार खर्च करेगी। पुष्कर व अजमेर में काम शुरू हो चुका है। जयपुर में मानसागर झील (जलमहल) को मंजूरी मिलने के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण ने काम शुरू कर दिया है। इस पर करीब 24 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
क्या-क्या काम होंगे
>> झीलों का सौंदर्यीकरण
>> झीलों की नियमित सफाई
>> कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाना और बारिश का पानी झीलों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना।
जिलास्तरीय कमेटी का गठन
राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत जिस जिले में झील संरक्षण का काम होगा, वहां कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा, जो निरंतर कार्य की रिपोर्ट तैयार करेगी।
और बारह झीलों की रिपोर्ट बनेगी
इस योजना के तहत राज्य में और 12 झीलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। पहले चरण में उदयपुर की उदयसागर, गोर्धन सागर, बड़ी का तालाब, डूंगरपुर के गेब सागर और कोटा के किशोर सागर का चयन किया गया है।