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अटके वेटनरी काउंसिल के चुनाव

भोपाल. राज्य शासन द्वारा बजट उपलब्ध नहीं कराए जाने से मध्य प्रदेश वेटनरी काउंसिल के चुनाव अटक गए हैं। हालांकि शासन ने अगस्त में काउंसिल के चुनाव की अधिसूचना जारी की है और करीब तीन महीने पहले निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति भी की जा चुकी है। काउंसिल में करीब 2400 पशु चिकित्सक रिजस्टर्ड हैं।

इससे पहले वर्ष 2000 में काउंसिल के चुनाव हुए थे। नियम के मुताबिक हर तीन साल में काउंसिल के चुनाव होने चाहिए, इसलिए अगले चुनाव वर्ष 2003 में होने थे, पर अब तक काउंसिल के चुनाव नहीं हो पाए हैं। निर्वाचन अधिकारी डा. मथुरा सिंह का कहना है कि चुनाव के लिए बजट नहीं मिलने से चुनाव की प्रक्रिया चालू नहीं हो पाई है। इस संबंध में उन्होंने शासन को लिखित में जानकारी दे दी है।

चार सदस्यों का चुनाव

मप्र वेटनरी काउंसिल के चुनाव में चार सदस्यों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा तीन सदस्यों का मनोनयन किया जाएगा। तीनों वेटनरी कालेजों के डीन और संचालक पशु चिकित्सा संवाएं भी काउंसिल के सदस्य होते हैं। ये सभी अध्यक्ष का चयन करते हैं।

क्या काम करती है काउंसिल

भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम 1984 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करवाना। इसके अंतर्गत स्नातक पशु चिकित्सकों का पंजीयन करना, उनके व्यावसायिक आचरण पर नजर रखना आदि शामिल है।

चुनाव नहीं होने से परेशानी

मप्र वेटनरी काउंसिल शासन को अगले वित्त वर्ष का बजट नहीं भेज पाती। ठ्ठ बजट में से काउंसिल के खर्च का अनुमोदन प्राप्त नहीं कर सकते। ठ्ठ काउंसिल नीतिगत मामलों पर निर्णय नहीं कर सकती। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता।





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