जयपुर. राज्य की धरती जल्द ही सोना उगलेगी। प्रदेश में खान एवं भूविज्ञान विभाग, भारतीय खान सर्वेक्षण ब्यूरो सहित अन्य एजेंसियों ने सोना, तांबा, लेड और जिंक जैसे महंगे धातु भंडारों की खोज की है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, खेतड़ी, अजमेर व अलवर में सोने के भंडारों की खोज की जा चुकी है। नई खनिज नीति के तहत इनका खनन संभव हो सकेगा। अभी तक खनन के लिए कई अड़चनें थीं।
जयपुर आए केंद्रीय खान सचिव जे.पी. सिंह ने बताया कि नई खनिज नीति लागू होने के बाद बड़ा निवेश करने वाली कंपनियों का आगमन होगा। इससे सोने सहित अन्य महंगे खनिजों के खनन की संभावनाएं बढ़ेंगी। नई नीति के तहत एक से अधिक कंपनियों को रिकोगनेंस परमिट दिया जा सकेगा। उन्हीं को प्रोसपेक्टिंग लाइसेंस और उसके माइनिंग लीज देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दुनिया भर की कंपनियां यहां निवेश करेंगी। इन कंपनियों द्वारा वैज्ञानिक तरीके काम करने से खनन की लागत कम आएगी। उन्होंने बताया कि सोने के खनन की संभावनाएं नहीं होती तो खोज का काम कर रही कंपनियां अब तक यह काम छोड़कर चली जातीं। देश में भंडार होने के बावजूद सोना, डायमंड, निकल, लेड आदि धातुओं का आयात करना पड़ रहा है।
राज्य में स्थित भंडारों में सोने की मात्रा कम होने से जो भी कंपनी यहां खनन करेगी, उसे प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित करनी पड़ेगी। राज्य को रॉयल्टी मिलने के साथ-साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
-प्रो.पी.एस. राणावत, भूवैज्ञानिक
राज्य में सोने के भंडार
राज्य में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, खेतड़ी, अलवर, व अजमेर में सोने के भंडारों की खोज की जा चुकी है। प्रारंभिक अनुसंधान में प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक सोने की 1 से 4 पीपीएम की मात्रा ही मौजूद है। कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइंस में चार पीपीएम मात्रा होने पर भी सोने का खनन किया जा रहा है।
बीस कंपनियां कर रही हैं खोज
खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधिकृत सूत्रों के अनुसार राज्य में 20 कंपनियां सोना, कॉपर, मैग्नीज, लोहा, जिंक और लेड जैसे खनिजों की खोज कर रही है। इन कंपनियों को 70 परमिट दिए हुए हैं। किसी भी कंपनी को 5 हजार वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन नई नीति के तहत इस क्षेत्र को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।