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मकसद पूरा नहीं हुआ समाधान रथ से

टीकमगढ़. जिले के सभी 6 ब्लाकों में जनता की समस्याओं को हल करने प्रशासन की ओर से समाधान रथ गांव-गांव भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह रथ लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाए सिर्फ घूमकर खानापूर्ति कर रहे हैं।

जिले के निवाड़ी, टीकमगढ़, पलेरा, बल्देवगढ़, जतारा और पृथ्वीपुर ब्लाक में प्रदेश सरकार के निर्देशों के तहत प्रशासन की ओर से समाधान रथ गांव-गांव जा रहे हैं। पलेरा ब्लाक के समाधान रथ को गुरुवार को बम्होरीकला गांव पहुंचना था इसलिए लोग सुबह से एकत्रित होकर रथ का इंतजार करते रहे, लेकिन रथ शाम को गांव में पहुंचा तब तक ग्रामीण पंचायत कार्यालय से वापस चले गए।

दिन गुजरने के बाद आया रथ भी थोड़ी देर गांव में रुकने के बाद चला गया जिसे मवई गांव जाना था लेकिन अब तक नहीं पहुंचा है। गांव के रज्जू रैकवार और लक्ष्मी पुजारी ने बताया कि वे गरीबी रेखा में नाम जुड़वाने और हैंडपंप सुधरवाने की समस्याओं का निदान चाहते हैं।

क्या है समाधान रथ

चलित समाधान रथ योजना प्रदेश सरकार के निर्देशों के तहत शुरूकी गई है, इसमें एक वाहन गांव-गांव जा रहा है। रथ में ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े विभाग के कर्मचारी (आरआई, पटवारी, पंचायत सचिव, कृषि विस्तार अधिकारी और इंजीनियर) रहते हैं जिनका काम गांवों में लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निदान करना है।

अनुपस्थित रहने पर वेतन काटा

समाधान रथ में ड्यूटी पर तैनात कई कर्मचारी रथों पर नहीं जा रहे हैं। 1 अप्रैल को चलित समाधान रथ से अनुपस्थित रहने के कारण पलेरा तहसीलदार नाथूराम आदिवासी और एक एमपीडब्ल्यू का कलेक्टर विवेक पोरवाल ने एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी किया है। श्री पोरवाल ने कहा कि चलित समाधान रथ में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों के लापरवाही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





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