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शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी इंटरनेशनल रेसलर जगजीत सिंह उर्फ टाइगर जीत सिंह अपने संघर्ष भरे दिनों को भूले नहीं हैं। यही वजह है कि वह आज भी जमीन से जुड़े हुए शख्स हैं।
कनाडा में अपने शुरुआती दिनों को याद कर शुक्रवार को प्रेस क्लब में 52 वर्षीय टाइगर जीत सिंह की आंखें भर आईं। वह यहां एक निजी कंपनी के साथ जुड़कर युवाओं को नशे के प्रति जागरूक करने और एजूकेशन को बढ़ावा देने आए हैं। इसी मौके पर रेसलिंग को बढ़ावा देने के मकसद से न्यू जनरेशन स्पोट्र्समेन सोसायटी भी लॉन्च की गई।
टाइगर जीत सिंह बताते हैं, ‘1965 में मैं लुधियाना के गांव से पहलवानी करने की चाहत लेकर कनाडा गया था। उस समय मेरी जेब में सिर्फ छह डॉलर थे। कनाडा में न तो कोई अपना था और न ही रोजी-रोटी कमाने का साधन। मैं वहां वाईएमसीए से जुड़ गया। अंग्रेजी न आने के कारण मैं कनेडियन की बात नहीं समझ पाता था। काफी मशक्कत के बाद सौ रुपए डॉलर वीक वाली नौकरी मिली। पांच डॉलर में मैं रेसलिंग करता था।
इसी तरह मैंने पांच साल गुजारे। 1971 में 6800 डॉलर का ब्रेक मिला और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।’टाइगर ने कहा, यह वाहेगुरु की बख्शीश ही है जिसने मुझे ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
सौ एकड़ का रेजीडेंस : टाइगर का कनाडा में रेजीडेंस 100 एकड़ में फैला है। इसमें रेजीडेंशियल प्लॉट, टेनिस कोर्ट, प्राइवेट जिम, स्वीमिंग पूल, ट्रेकिंग पाथ और अन्य सुविधाएं हैं। 50 मिलियन डॉलर का होटल है। टोक्यो, साउथ अफ्रीका और फ्लोरिडा में भी घर है। वे कहते हैं, ‘पैसा हाथ का मैल है। आज है तो कल नहीं। मैं सुबह उठकर सुखमनि साहिब का पाठ करता हूं और उसके बाद दो-तीन घंटे कसरत।’
जानवर प्रेमी हूं मैं
टाइगर के कमरे की खिड़की से नहर दिखती है जिसके दूसरे किनारे पर जानवर रहते हैं। सुबह-सुबह जानवरों को देखकर उन्हें सुकून मिलता है। उन्होंने बताया कि मैंने शिकार पर पाबंदी लगा रखी है और मैं मछली भी पालता हूं।
टेक्निक में कमजोर है खली टाइगर का कहना है कि खली विदेश में इंडिया का नाम रोशन कर रहा है, इससे मैं बहुत खुश हूं। उसने गरीबी से उठकर खास मुकाम हासिल किया है लेकिन उसकी टेक्निक और थिंकिंग पावर कमजोर है। इसी वजह से वह मात खा जाता है।
बेटा संभाल रहा है प्रापर्टी
टाइगर ने बताया कि उनके तीन बेटों में से एक पुलिस में डिटेक्टिव है और दूसरा होटल मैनेजमेंट कर रहा है। सबसे छोटा बेटा शुरू में रेसलिंग करता था लेकिन छह-सात साल से वह उनकी प्रापर्टी संभाल रहा है। टाइगर के अनुसार उनकी सफलता में उनकी पत्नी सुखजीत का विशेष योगदान है। कनाडा में उनकी लाइफ पर ‘टाइगर’ नामक फिल्म भी बनी जिसे कई अवार्ड मिले।
अभी तो मैं जवां हूं
52 वर्षीय टाइगर जीत सिंह कहते हैं कि जब तक वह तंदुरुस्त रहेंगे, रेसलिंग करते रहेंगे। अपनी सफलता का राज स्पीड, टेक्निक, मूवमेंट और स्टेमिना हैं। मई में होने वाली रेसलिंग में उन्होंने ओपन चैलेंज दिया है।
अखाड़ा को करना होगा फिर से जीवित
टाइगर जीत सिंह का कहना है कि पंजाब में अखाड़ों में पहलवानी खत्म होती जा रही है। वे उसे पुनर्जीवित करेंगे और ऑल ओवर इंडिया में पहलवानों को सही गाइडेंस व डाइट सुविधाएं देंगे। दारा सिंह की कुश्ती देखकर उनमें पहलवानी करने का शौक जागा था।
यादगार लम्हें
>> जापान के होटल में खाना खाते समय वहां की मशहूर फिल्म स्टार द्वारा प्रशंसा करना। बाद में पगड़ी में हाथ लगाने पर उसी एक्ट्रेस पर थप्पड़ जड़ना। इसके बाद खूब हंगामा हुआ। >> आस्ट्रेलिया में लाइव इंटरव्यू के दौरान गोरे पत्रकार द्वारा पंजाबी पहरावे को गलत कहने पर पत्रकार को थप्पड़ जड़ना।
और क्या खास है टाइगर में
>> टाइगर नाम से वाइन >> टाइगर नाम से कुकीज >> टाइगर जीत सिंह और टाइगर अली के नाम से कनाड़ा में सड़कें बनी। >> जापान में प्रमोटर करते हैं खाना स्पॉन्पर्स
असली नाम : जगजीत सिंह हंस, रिंग नेम : टाइगर जीत सिंह,
हाइट : 6 फुट 3 इंच, वेट : 120 किलो, ट्रेनर : फ्रेड एकटिन,
डाइट : सुबह-करीब 20 अंडे, दो पीस टोस्ट और दो बड़ी कटोरी दही।
दोपहर : दो किलो वाइट मीट और उबले हुए सलाद की दो थाली।
रात : दो किलो फिश, एक किलो राइस और सलाद।