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फैसला उलटने की सरकारी तैयारी

इंदौर. रालामंडल अभयारण्य को डिनोटिफाई करने के प्रस्ताव के भारी विरोध के बाद सरकार का रुख भी बदलने लगा है। वह अपने तईं प्रस्ताव वापस बुलाने के बजाय जनता और जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी को माध्यम बनाना चाहती है। यह औपचारिकता पूरी करने भोपाल से कुछ अफसर रविवार को इंदौर आएंगे।

आला अफसर जानते हैं इंदौर से अभयारण्य को बनाए रखने के ही सुझाव आएंगे। उसी आधार पर स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के माध्यम से केंद्र को नया प्रस्ताव भेजा जाएगा। इससे डिनोटिफिकेशन का प्रस्ताव भेजने की गलती भी दुरुस्त हो जाएगी। इस प्रस्ताव का शहर की जनता ने इंदौर से दिल्ली तक जमकर विरोध किया। कांग्रेस ने तो भाजपाइयों को भू-माफिया तक कहा।

भाजपा नेता भी खुलकर तो विरोध नहीं कर पाए लेकिन अंदरूनी तौर पर उन्होंने भी इसके खिलाफ ही मत रखा। बताया जाता है प्रमुख भाजपा नेताओं के आग्रह के बाद सरकार भी इस मुद्दे को खत्म करना चाहती है ताकि कांग्रेस लाभ न ले सके। उधर, प्रमुख सचिव वन प्रशांत मेहता का कहना है हम जनता को बताना चाहते हैं ईको-टूरिज्म से रालामंडल के वन क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। वैसे जो भी सुझाव मिलेंगे उन्हें पूरा महत्व दिया जाएगा।

यह होगा बैठक में

रविवार की बैठक में प्रमुख सचिव व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. पी.बी. गंगोपाध्याय ईको-टूरिज्म सेंटर के फायदे बताएंगे और सरकार की तरफ से समझाएंगे यह अभयारण्य से ज्यादा फायदेमंद है। फिर जनता के सुझाव लेंगे जो राज्य सरकार को सौंपे जाएंगे।

रह सकते हैं सौ से ज्यादा जानवर

अभयारण्य में फिलहाल नीलगाय, लकड़बग्घे व भेड़की सहित 24 जानवर हैं। यहां काला हिरण व चीतल बढ़ाए जा सकते हैं और इस प्रजाति के सौ से ज्यादा जानवर रह सकते हैं। पिछले वर्ष तेंदुओं के यहां आने से भी अभयारण्य का महत्व बढ़ा है।





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