इंदौर. नेहरू पार्क स्विमिंग पूल में डूबने से एक युवक की मृत्यु हो गई। हादसा शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे हुआ तब तैरने का समय नहीं था। फिर भी अवैध वसूली कर 50 से ज्यादा लोगों को इंट्री दी गई थी। युवक 15 मिनट तक पानी में डूबता-उतराता रहा और जान बचाने की गुहार लगाता रहा लेकिन इतने लोग व ट्रेनर नहीं बचा पाए।
प्रत्यक्षदर्शी नितिन कुशवाह, योगेश गणगोरे, अमित सकरवाल, विकास अटावले और शैलेंद्र कुंदेल ने बताया हम अंजनीनगर निवासी नरेंद्र जाटव (23) के साथ तैरने आए थे। दोस्तों ने बताया था पूल सुबह 10.30 से 4 बजे तक बंद रहता है। उस समय सौ रुपए देकर तैर सकते हैं। हमने ऐसा ही किया। अंदर पहुंचकर देखा 50 से ज्यादा लोग पहले से तैर रहे थे। कुछ ट्रेनर भी मौजूद थे।
नरेंद्र और योगेश तैरने उतरे और बाकी साथी तैयारी कर रहे थे। कुछ देर में वे गहराई में पहुंचे और नरेंद्र डूबने लगा। हमने सोचा डुबकी लगाकर बाहर आ रहा होगा लेकिन वह छटपटाने लगा और बचाव के लिए चिल्लाया तो सब घबरा गए। बाहर खड़े दोस्त तो मारे डर के पूल में ही नहीं उतरे। वहीं तैर रहे अन्य लोग भी बचाने के बजाय फटाफट बाहर निकल आए। इस बीच नरेंद्र ने योगेश को पकड़ लिया तो वह भी घबरा गया क्योंकि तैरना दोनों ही नहीं जानते थे। योगेश ने जैसे-तैसे खुद को छुड़ाया और बाहर आ गया।
पंद्रह फीट गहराई से खींचा
नरेंद्र को डूबता देख दोस्तों ने ट्रेनर और तैरने आए अन्य लोगों से बचाने की गुहार की लेकिन सभी इधर-उधर हो गए। इस बीच एक युवक कूदा और 15 फीट गहराई से उसे जैसे-तैसे खींचकर बाहर लाया। तब तक वह मरणासन्न हो गया था। तुरंत लोडिंग रिक्शा से एमवाय अस्पताल ले गए जहां मृत घोषित कर दिया।
फटाफट भगाकर ताला लगाया
हादसे के बाद ट्रेनर व चौकीदार ने सबको बाहर निकालकर चैनल गेट पर ताला लगा दिया। पुलिस को काफी देर बाद अस्पताल से सूचना मिली। तब तक वहां सन्नाटा हो गया था। बाद में नरेंद्र के दोस्तों ने घटनाक्रम बताया।
रोज होता है ऐसा
स्विमिंग पूल में तैरने का निर्धारित समय पुरुषों के लिए सुबह 5 से 9 और शाम 5 से 7 बजे है। महिलाओं के लिए सुबह 9.30 से 10.30 और शाम 4 से 5 बजे आरक्षित है। सुबह 10.30 से 4 बजे तक पूल बंद रहता है। जानकारों के मुताबिक लंबे समय से तीन-चार के समूह को सौ रुपए लेकर अवैध इंट्री दी जा रही है। ऐसे दो सौ से ज्यादा लोग रोज आते हैं। इनमें ज्यादातर तैरना नहीं जानते इसलिए ट्रेनर से भी समय लेकर पहुंचते हैं।
‘दीवार फांदकर आते हैं’
पूल बंद होने के समय हादसा कैसे हो गया? इस पर चौकीदार भंवरसिंह ठाकुर ने कहा लोग पीछे की दीवार फांदकर घुस आते हैं। इसकी शिकायत कई बार ऊपर तक कर चुके हैं। क्या 50 से ज्यादा लोग दीवार फांदकर घुस आए? इस पर उसने कहा मेरी ड्यूटी 2 बजे से थी। इससे पहले गजाजन यादव की ड्यूटी थी।
बहन की शादी धूमधाम से करना चाहता था नरेंद्र
झांसी के मध्यमवर्गीय परिवार का नरेंद्र इंदौर में अकेला रहता था। परिवार में माता-पिता, एक भाई व बहन हैं। वह 16 साल की उम्र से ही चमड़े के खिलौने बनाने लगा था। कुछ साल से बजरंगनगर की एक खिलौना फैक्टरी में काम कर रहा था। अगले महीने होने वाली बहन की शादी के लिए रुपए जुटा रहा था। हादसे की सूचना मिलने पर परिजन इंदौर के लिए निकल गए।