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छात्रों को मोहलत छात्राएं परेशान

पुष्कर. दसवीं बोर्ड की परीक्षा के दौरान शुक्रवार को यहां बिजली गुल होने की वजह से परीक्षार्थियों ने अतिरिक्त समय की मांग को लेकर हंगामा मचाया। खास बात रही कि छात्रों को तो पंद्रह मिनट का अतिरिक्त समय मिल गया लेकिन छात्राओं को मोमबत्ती की रोशनी में परीक्षा देनी पड़ी।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को कक्षा दसवीं की गणित विषय की परीक्षा थी। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा केन्द्र पर छात्र एवं राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा केन्द्र पर छात्राएं परीक्षा दे रही थीं। इसी बीच तेज अंधड़ एवं बारिश की वजह से बिजली गुल हो गई। जिससे दोनों परीक्षा केन्द्रों में अंधेरा छा गया।

परीक्षार्थियों ने उपस्थित शिक्षकों से बिजली बंद होने की वजह से अतिरिक्त समय की मांग की। लेकिन शिक्षकों ने उनकी एक नहीं सुनी। जिससे उनमें रोष उत्पन्न हो गया और वे टेबल-कुर्सियां पीटने लगे। हंगामे को देखते हुए छात्रों के स्कूल में शिक्षकों ने बोर्ड ऑफिस में उच्च अधिकारियों से सम्पर्क कर परीक्षार्थियों की समस्या से अवगत कराया। इस पर छात्रों को प्रश्न-पत्र हल करने के लिए पंद्रह मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया लेकिन बालिका विद्यालय में अध्यापिकाओं ने बोर्ड से संपर्क नहीं किया इसलिए छात्राओं को तेज हवा के कारण बार-बार बुझती मोमबत्तियों की रोशनी में परीक्षा देनी पड़ी। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें अतिरिक्त समय दिए जाने की बजाय पांच बजते ही अध्यापिकाओं ने उनकी उत्तर पुस्तिकाएं छीन लीं।

कॉपियों में लिखी व्यथा

कई परीक्षार्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में लिखा कि बिजली गुल होने की वजह से प्रश्न पत्र हल नहीं कर सके। विषम परिस्थितियों के लिए केन्द्रीधीक्षकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को अधिकार दे रखे हैं। केन्द्र पर व्यवस्था का दायित्व जिला शिक्षा अधिकारी का है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि 15 मिनट से लेकर 30 मिनट तक का अतिरिक्त समय दे सकते हैं।
-लीलाधर यादव, सचिव राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

छात्र जिस केन्द्र पर परीक्षा दे रहे थे वहां से शिकायत मिली थी इसीलिए समय दे दिया गया। छात्राएं जिस स्कूल में परीक्षा दे रहीं थीं वहां से इस संबंध में कोई संपर्क नहीं किया, लिहाजा मेरी जानकारी में यह मामला नहीं आया।
-ओमप्रकाश शर्मा,जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा

जालसाज ने भी दिया परचा

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जाली दस्तावेज के आधार पर उम्र बढ़वाने के आरोपी बांसवाड़ा के एक छात्र ने बोर्ड की जानकारी में होते हुए भी वर्ष 2008 की बारहवीं कक्षा की परीक्षा दे ली, लेकिन बोर्ड जालसाजी में भागीदार रहे अपने अफसर को चार्जशीट तक नहीं दे सका। इस मामले में बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी चंदेलिया ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बोर्ड सचिव को अधिकृत किया था।

बांसवाड़ा के छात्र कीर्तिश गुर्जर ने जाली दस्तावेज पेश कर अपनी उम्र में तीन साल बढ़वा लिए थे। इस काम में बोर्ड की परीक्षा शाखा के एक अफसर छगनलाल की खास भूमिका थी। उन्होंने सहायक निदेशक रहते कीर्तिश गुर्जर की जन्म तिथि में परिवर्तन किया था। भांडा फूटने के बाद बोर्ड ने जांच करवाई जिसमें छगनलाल को गड़बड़ी के लिए उत्तरदायी माना। जांच कराए 8 माह हो गए, लेकिन बोर्ड सचिव अपने अफसर को चार्जशीट नहीं दे पाए, जबकि आरोपी छात्र ने बारहवीं की परीक्षा दे ली।

क्या था मामला

कीर्तिश गुर्जर ने पिता की मौत के बाद सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए अपनी उम्र में तीन साल की बढ़ोतरी करवाई थी। इसके लिए उसने बांसवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी का जाली पत्र जारी करवाया था। बोर्ड के सहायक निदेशक (परीक्षा द्वितीय) छगनलाल ने अपने स्तर पर उसकी जन्म तारीख में परिवर्तन करवा दिया। मामला उछलने पर बोर्ड के तत्कालीन विशेषाधिकारी ने जांच की और छगनलाल को दोषी पाया।





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