हैदराबाद. विकास की अंधी दौड़ में शामिल हैदराबाद सरीखे शहरों में अनधिकृत कब्रिस्तानों की जमीनों का व्यावसायिक उपयोग और उस पर भूमाफियाओं के अवैध कब्जे से शवों को दो गज जमीन नसीब होना भी मुश्किल होता जा रहा है।
दीना मस्जिद के मौलाना खली कादरी के मुताबिक, शहर के कुछ कब्रिस्तानों की एक-एक कब्र में 15 से 20 मुर्दे तक दफन हैं। कहीं-कहीं यह संख्या 25 से भी ऊपर जा पहुंची है। जहांनुमा कब्रिस्तान में एक ही कब्र की 15 परतों में रिकार्ड 57 शव दफन हैं। हालांकि कब्रिस्तान कमेटी ने एक कब्र में अधिकतम पांच शवों को दफनाने की सीमा निर्धारित की है।
जमीन से झांकते कंकाल : हालात इतने बदतर हैं कि कई बार नए शवों के लिए जगह बनाना हो तो पहले से दफन शवों की जगह बदलनी पड़ती है। ज्यादा बारिश में कभी-कभी कंकाल जमीन की सतह पर भी आ जाते हैं। गत वर्ष जून में शहर के शालीबंदा इलाके के रहवासियों में उस समय दहशत पैदा हो गई, जब उन्हें भारी बारिश के बाद कब्र से बहकर बाहर निकले करीब 50 कंकाल सड़क पर दिखाई दिए।
तगड़ी फीस : मेहंदीपट्टनम मस्जिद के मौलाना बशीरुद्दीन खलील का कहना है कि समस्या की एक वजह शव दफन के लिए तय तगड़ी फीस भी है। कब्रिस्तान कमेटी साधारण शव को दफनाने के लिए 1,500 रुपए और विशेष शव के दफन के लिए 15 हजार रुपए लेती है।
कब्र पर कब्जा : कब्रिस्तान की जमीन पर संकट भू माफियाओं की वजह से भी गहराया है। वे कब्रिस्तान की जमीनों पर कब्जा कर उसकी जगह अपार्टमेंट और हाउसिंग कॉलोनियां बनाने में लगे हुए हैं।