लंदन. दांतों में सड़न को रोकने के लिए आमतौर पर दंत चिकित्सक उसे भर देता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अब वह दिन दूर नहीं, जब सड़े हुए दांत को खुद ही अपनी मरम्मत करने में सक्षम बनाया जा सकेगा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मुमकिन हो सकता है दांतों के बीच मौजूद रहने वाले पीले रंग के एक पदार्थ ‘डेंटाइन’ की मदद से। उन्होंने ‘डेंटाइन’ के फिर से पनपने का एक तरीका विकसित कर लिया है। सड़न से ‘डेंटाइन’ ही सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। शोधकर्ताओं को यकीन है कि वे अगले एक दशक के भीतर इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगे और फिर सड़न वाले दांतों को भरने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
समाचार पत्र ‘डेली टेलीग्राफ’ ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सेली मार्शेल के हवाले से बताया कि इस तकनीक के तहत क्षतिग्रस्त ‘डेंटाइन’ पर कैल्शियम के घोल को पेंट कर दिया जाता है। इससे ‘डेंटाइन’ में फिर से पनपने की प्राकृतिक क्षमता पैदा हो जाती है। मार्शेल के मुताबिक, इस संबंध में शुरुआती प्रयोग सफल रहे हैं, लेकिन एक दांत में मौजूद सभी ‘डेंटाइन’ के फिर से पनपने की क्षमता विकसित करने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है।