नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने आखिरकार मान लिया है कि उच्च शिक्षा में फीस बढ़ोतरी को रोकना उसके बस में नहीं है और आईआईएम व आईआईटी के बाद अन्य उच्च शिक्षण संस्थान भी फीस में इजाफे की कोशिश कर सकते हैं।
केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डी पुरनदेश्वरी का कहना है कि हमें पचास साल पुराने र्ढे पर तय किए गए फीस के ढांचे के आधार पर संस्थान चलाने की बात नहीं सोचनी चाहिए। जिस तरह से सभी चीजों की लागत बढ़ रही है, उससे उच्च शिक्षण संस्थाओं में फीस का बढ़ना भी लाजिमी है।
ईआईटी द्वारा फीस बढ़ाने के मसले पर उन्होंने कहा कि उसने 10 साल बाद अपने फीस के ढांचे की समीक्षा की है। उन्होंने माना कि फीस तो बढ़ना तय है, लेकिन कितनी बढ़ेगी, अभी यह स्पष्ट नहीं है।
सरकार की चिंता : पुरनदेश्वरी ने कहा कि केंद्र की चिंता यह है कि फीस बढ़ने से कोई भी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न हो। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की मदद के लिए बैंकों से करार करने के साथ ही छात्रवृत्ति बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।