HomeNewsChhattisgarhRaipur Raipur

8 दिन बाद कैसे बेचेंगे धान

महासमुंद. कृषि उपज मंडियों में ग्रीष्मकालीन धान 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का सरकारी फरमान जारी होते ही खरीदी की तैयारी शुरू हो गई है। घोषित तिथि के लिए अब सप्ताहभर का समय ही शेष रह गया है। जबकि, खेतों में धान के पौधों में अभी बालियां भी नहीं आ पायी है। तब सवालिया निशान लगाया जा रहा है कि मंडियों में आखिर किसकी खरीदी होगी। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि धान की फसल जब तैयार ही नहीं है तब बेचेंगे क्या? जब तक फसल आएगी तब तक अवधि खत्म हो चुकी होगी। किसान तिथि बढ़ाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।

सरकार की अव्यवहारिक नीति के चलते समर्थन मूल्य में ग्रीष्मकालीन धान खरीदी की योजना फ्लाप होने की स्थिति में है। सरकार ने 15 अप्रैल से 15 मई तक धान खरीदी करने का फरमान जारी किया है। खेतों में धान पौधांे में अब तक बालियां नहीं निकल पाई है और किसानों के मुताबिक धान को पकने में एक से डेढ़ माह का समय और लगेगा। इसके बाद ही मंडी में धान पहुंचेगी। तब तक खरीदी का समय समाप्त हो चुका होगा। किसानों की मानें तो प्रति वर्ष मई के प्रथम सप्ताह के बाद ही ग्रीष्मकालीन धान की कटाई शुरू होती है।

किसानों के अलावा कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी भी शासन के 15 अप्रैल से 15 मई तक धान खरीदी के निर्णय को अव्यवहारिक बता रहे है। ग्रीष्म काल में महामाया, एमटीयू 1001, 1010, पूर्णिमा वेराइटी के धान अधिकांश किसान लगाते हंै। जिले में 19212 हेक्टेअर क्षेत्र किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान की फसल बोई है। खराब मौसम के चलते धान बोनी का कार्य पिछड़ गया था। जिसका स्पष्ट असर खेतों में दिख रहा है और धान पकने में विलंब की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। भास्कर प्रतिनिधि द्वारा अनेक किसानों से चर्चा की गई।

अधिकांश का कहना था कि जब तक धान पककर खेतों से खलिहान पहुंचेगा तब तक समर्थन मूल्य में धान खरीदी की तिथि समाप्त हो जाएगी। इससे ऐसा लगता है शासन किसानों का धान खरीदना नहीं चाहती और केवल दिखावे के लिए धान खरीदने की बात कर रही है। शासन ने अपेक्स को धान खरीदी के लिए एजेंसी नियुक्त किया है। जिले में महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना, सराईपाली कृषि उपज मंडी तथा झलप उपमंडी में धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। सभी मंडियों को इसकी जानकारी भेज कर तैयारी करने कहा गया है।

45 हजार टन धान खरीदी का लक्ष्य

शासन द्वारा ग्रीष्मकाल में महासमुंद जिले में साढ़े चार लाख क्ंिवटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। बीते वर्ष 32 हजार 563 टन धान की खरीदी जिले में 16 मई से 15 जून के बीच की गई थी। किंतु, इस बार एक माह पहले ही धान खरीदी करने का निर्णय ले लिया गया है। इस अव्यावहारिक निर्णय से सभी अचंभित हैं। ग्राम मचेवा के कमलेश यादव ने बताया कि गौरीशंकर शर्मा के यहां साढ़े 4 एकड़ में महामाया धान बोई गई है। जिसे पकने में डेढ़ माह का समय लगेगा।

बसना ब्लाक के ग्राम आमापाली से कृषि विभाग दफ्तर पहुंचे किसान श्रीपति वैष्णव व परमेश्वर राणा ने बताया कि 15 मई के पहले धान की कटाई नहीं हो सकती। श्रीपति वैष्णव 3 एकड़ में 1001 तथा परमेश्वर राणा 10 एकड़ में 1010 प्रजाति धान की फसल ली है। दोनों किसानों का कहना था कि कही-कही पर धान में बालियां आनी शुरू हुई है। पटेवा के किसान योगेश लोधी ने बताया कि पानी-बारिश की वजह से फसल पिछड़ी है। किसी भी किसान का धान मई के प्रथम सप्ताह के पहले पककर तैयार हो पाना नामुमकिन है। इस तरह 15 अप्रैल से धान खरीदी का निर्णय अव्यावहारिक साबित हो रहा है।

धान खरीदने प्रशासनिक तैयारी पूरी

डीएमओ सीआर जोशी ने पूछने पर भास्कर को बताया कि धान खरीदी के लिए उनके पास 20 लाख बारदाना है और धान खरीदी की पूरी तैयारी है। समर्थन मूल्य पर मोटा धान 645 रुपए प्रति किवटल तथा पतला धान 675 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा 100 रुपए बोनस किसानों को प्रति क्ंिवटल दिया जाएगा। नमी मापक यंत्र मंडियों में है। जहां नहीं वहां एफसीआई से आपूर्ति की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि ग्रीष्मकालीन धान की कटाई के लिए अनेक कारणों से मजदूर नहीं मिलते और अधिकतर किसान हार्वेस्टर से धान की कटाई-मिजाई कर सीधे मंडी पहुंचते है। जिसके कारण धान में नमी की मात्रा ज्यादा रहती है। खरीफ में भी अनेक सोसाइटियों में नमी की शिकायत आई थी। एफसीआई ने नमी व गुणवत्ता की कमी के कारण बड़े पैमाने पर धान रिजेक्ट किया था। इसके चलते किसान और खरीदी एजेंसी के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित होती रही है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: