अलवर. बाघ विहीन सरिस्का को बाघों से आबाद करने के लिए रणथंभौर अभयारण्य से हेलीकॉप्टर में बाघिन को लाया जाएगा। विश्व का यह पहला मामला है कि एक जंगल से दूसरे जंगल में बाघों को विस्थापित किया जा रहा है।
वन राज्य मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने सोमवार को यहां पत्रकारों को बताया कि सरिस्का अभयारण्य में लाई जाने वाली बाघिन को चिन्हित कर लिया गया है। इस बाघिन की उम्र चार-पांच वर्ष है तथा एक बार मां बन चुकी है। रणथंभौर अभयारण्य में इसकी गतिविधियों को वाच किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कार्य वाइल्ड लाइफ इस्टीट्यूट देहरादून व वन विभाग के सहयोग से किया जा रहा है।
मादा बाघ को शिफ्ट करने से पहले इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ एवं वन अधिकारी सरिस्का में डेरा डालेंगे। बाघिन के कुछ समय बाद दो नर बाघों को लाकर बसाया जाएगा। बाघिन को लाने के लिए एयरफोर्स के अधिकारियों से हैलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के संबंध में बातचीत की जा रही है। जिस दिन बाघिन को हैलीकॉप्टर में लाया जाएगा, उससे पहले ट्रैंक्यूलाइजर गन से बेहोश किया जाएगा।
सरिस्का में बाघिन के आने का उत्साह अभी से बना हुआ है और उसके स्वागत की तैयारियां भी की जा रही है। सरिस्का में कांकवाड़ी के पास एनक्लोजर में बाघिन को रखा जाएगा। यह करीब आठ हैक्टेयर में फैला हुआ क्षेत्र है जो बाघ के स्वच्छंद विचरण के लिए अनुकूल है। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि एक बार मां बनी बाघिन को लाने के पीछे विचार यह है कि सरिस्का में बाघों की वंशवृद्धि में कोई रुकावट नहीं है।