जयपुर.
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से राजस्थान के बाजार में इस साल साढ़े छह हजार करोड़ रुपए आने की संभावना है। यह संभावना बनी है कर्मचारियों को मिलने वाली भारी-भरकम एरियर राशि से। इसी के मद्देनजर अगले कुछ दिनों में बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों के विशेष ऑफर ले आएं तो आश्चर्य की बात नहीं होगी।
चतुर्थ श्रेणी स्तर के कर्मचारी को औसतन 2500 रुपए और वरिष्ठ आईएएस तथा समकक्ष अधिकारियों को 13 हजार रुपए तक का मासिक लाभ मिलेगा। इससे सरकारी खजाने पर करीब 250 करोड़ रुपए का मासिक भार पड़ेगा। इसके बाद राजस्थान सरकार में वेतन-भत्तों का खर्च 700 करोड़ से बढ़कर लगभग 1000 करोड़ तक होने की संभावना है। यदि वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप जनवरी 2006 से यह लाभ अप्रैल में दिया जाता है तो 26 माह का एरियर भी मिलेगा। इस तरह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को 65 हजार और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को 3 लाख 38 हजार रुपए मिलेंगे, यानी सरकार को 6 हजार 479 करोड़ रुपए कर्मचारियों में बांटने पड़ेंगे।
पेंशनरों के चेहरे भी खिलेंगे
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से राज्य के करीब पौने तीन लाख पेंशनरों के भी चेहरे खिले हुए हैं। इनको लागू करने के बाद कर्मचारियों से आधा लाभ, यानी 3240 रुपए का एरियर उन्हें भी मिलेगा। सरकार को मासिक पेंशन में भी करीब 125 करोड़ रुपए ज्यादा देने पड़ेंगे।
आशंका भी है
राज्य कर्मचारी संघों को अभी भी यह आशंका है कि कहीं राज्य सरकार उनके सपने को चकनाचूर न कर दे। पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के समय उन्हें नोशनल (केवल कागजी) वेतन वृद्धि दी गई थी। यह भी आशंका है कि राज्य सरकार केन्द्र के समान वेतन वृद्धि न देकर कहीं जुलाई 2006 से या उसके बाद से भी दे सकती है।
साढ़े 6 हजार करोड़ तो बाजार में आएंगे ही
राज्य कर्मचारी नेताओं के अनुसार यदि सरकार नोशनल वेतन लाभ अथवा जुलाई से भी छठे वेतन आयोग का लाभ देती है, तो भी इससे कम पैसा बाजार में नहीं आएगा। जितना पैसा राज्य कर्मचारियों का कम होगा, उससे ज्यादा पेंशनरों और केन्द्रीय कर्मचारियों को मिल जाएगा, जो आखिर तो बाजार में ही आना है।
वेतन विसंगतियां नहीं रहनी चाहिए छठे वेतन आयोग की लाभकारी सिफारिशों को लागू करने में किसी तरह की विसंगति नहीं रहनी चाहिए। राज्य के सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र के समान नकद भुगतान ही मिलना चाहिए।
-यश प्रताप सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत)
रोकड़ा ही मिले
जिस तारीख से केंद्र सरकार सिफारिशें लागू करे, उसी दिन से राज्य कर्मचारियों को भी नकद भुगतान मिलना चाहिए।
-शंकरसिंह मनोहर, अध्यक्ष, राजस्थान सचिवालय कर्मचारी संघ
महंगाई और बढ़ेगी :
भारतीय उत्पादक की मानसिकता अभी वॉल्यूम पर कमाने के बजाय कृत्रिम मांग पैदा करके कमाने की है। सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला पैसा प्रत्यक्ष रूप से बाजार में आएगा। इससे महंगाई और बढ़ेगी। मुद्रास्फीति में एक से डेढ़ प्रतिशत की वृद्धि तय है।
-डॉ.एन.सी.पहाड़िया, प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय
सरकारी कर्मचारी होंगे और कर्जदार :
उम्मीद ये है कि राज्य सरकार कर्मचारियों को पूरे एरियर का भुगतान नकद नहीं करेगी। लगभग छह माह का ही एरियर नकद मिलने की संभावना है, लेकिन वेतन बढ़ने पर मिलने वाला पैसा सीधा बाजार में आएगा। चूंकि बड़ी कंपनियों का माल बिक नहीं रहा है, इसलिए वे फाइनेंस पर सामान बेच रही हैं। जब वेतन बढ़ेगा तो कर्मचारी फाइनेंस पर चीजें लेने की कोशिश करेगा। परोक्ष रूप से वह और कर्जदार हो जाएगा।
-विजयवीरसिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय