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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. तीन अलग-अलग प्रकरणों में पुलिस जांच की प्रक्रिया से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने सोमवार को होम सेक्रेटरी, आईजी व तीन जिलों के एसपी से जवाब तलब किया। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव आरपी जैन, पुलिस महानिरीक्षक राजीव श्रीवास्तव, बिलासपुर एसपी प्रदीप गुप्ता, जांजगीर एसपी विवेकानंद एवं कोरबा एसपी हिमांशु गुप्ता ने सोमवार को हाईकोर्ट में हाजिरी दी।
पुलिस अधिकारियों ने पुलिस के आधुनिक प्रशिक्षण व वैज्ञानिक जांच की जानकारी देते हुए हाईकोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की कि प्रकरणों की जांच पूरी सक्षमता से की जाती है। हाईकोर्ट ने तीनों जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्दिष्ट प्रकरणों में जवाब पेश करने के लिए 3-3 सप्ताह का समय दिया है।
हाईकोर्ट में आज पुलिस के आला अधिकारियों का जमावड़ा रहा। तीन अलग-अलग प्रकरणों में पुलिस की जांच में उचित गुणवत्ता के अभाव तथा कार्रवाई से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने आला अधिकारियों को जवाब के लिए बुलाया था। जांजगीर में मार्केटिंग फेडरेशन के गोदाम से फर्जी डीओ के जरिए धान उठाने के मामले में हाईकोर्ट ने पांच में से दो आरोपियों की जमानतें मंजूर कर दीं।
लाखों के घोटाले के 3 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज >>
हाईकोर्ट के जस्टिस एलसी भादू ने प्रकरणों की सुनवाई करते हुए मार्कफेड के दो कर्मचारियों रामखिलावन साहू एवं एलियस खेमराज को डच्यूटी में लापरवाही का तो आरोपी पाया, परंतु घोटाले में उनकी संलिप्तता नहीं होने कारण उनकी जमानतें मंजूर कर दीं। वहीं मां महामाया, जांजगीर राइस मिल के संचालक रतनलाल यादव मुनीम शरद कौशिक एवं जगदीश शर्मा को घोटाले का आरोपी पाते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
आरोप है कि रतनलाल यादव ने मार्केटिंग फेडरेशन, जांजगीर से डीओ(डिलिवरी आर्डर) के 50 पन्नों की बुक उड़ा ली। इसमें से छह आर्डरों के जरिए उन्होंने 15 मार्च 2007 के बाद की तिथियों में 4595.5 क्विंटल धान, जिसकी कीमत 32 लाख 65 हजार 895 रुपए होती है, मार्कफेड के गोदाम से उठवा लिया। मार्कफेड के डीएम को इस गड़बड़ी का पता चला, तो उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट की।
कोरबा में बिना परिवहन शुल्क पटाए बस संचालन का मामला >>
हाईकोर्ट के समक्ष कोरबा के बस आपरेटर मोहम्मद अनीस मेमन द्वारा बिना परिवहन शुल्क पटाए अवैध रूप से बस संचालन का मामला पेश हुआ। इस मामले में आरटीओ ने बस आपरेटर को शुल्क बतौर ढाई लाख रुपए पटाने के लिए नोटिस दिया था, जवाब में उन्होंने उस चालान की मूल प्रति जमा की, जिसके जरिए परिवहन शुल्क जमा करना बताया गया था। आरटीओ ने चालान की प्रति के आधार पर बैंक से पूछताछ की, तो पता चला कि संबंधित चालान के आधार पर बैंक में कोई रकम जमा नहीं की गई। इस मामले में इसके पहले कि पुलिस आरटीओ दफ्तर से कथित चालान की प्रति हासिल करती, वहां अगिAकांड में दस्तावेज जलकर खाक हो गया।
बिलासपुर में फर्जी लोन
हाईकोर्ट के समक्ष शहर में फर्जी नाम से ऋण हासिल करने का मामला पेश किया गया। इसके मुताबिक सेमुएल जेम्स नामक व्यक्ति पर फर्जी नाम से गृह निर्माण सोसायटी बनाकर अलग-अलग नामों से सेंट बैंक से ऋण अर्जित करने तथा मकान विक्रय करने का आरोप है।
अवमानना मामले में शासन पर 3000 जुर्माना >>
ट्रिब्यूनल के आदेश का क्रियान्वयन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने शासन को जवाब के लिए दिया 3 सप्ताह का समय, नायब तहसीलदार की पदोन्नति रोकने का मामला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस सतीश कुमार अग्निहोत्री ने ट्रिब्यूनल के आदेश की अवमानना के मामले में राज्य शासन पर 3 हजार रुपए जुर्माना किया है। शासन को जवाब प्रस्तुत करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया गया है।
प्रकरण के अनुसार याचिकाकर्ता समीर कुमार नाग नायब तहसीलदार के पद पर अप्रैल 1979 में पदस्थ हुए। 1979 में उनकी परीविक्षा अवधि समाप्त हुई। इसके बाद उन्होंने विभाग से अनुमति लेकर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अंतर्गत डीएसपी की परीक्षा दी, जिसमें चयन के बाद उनकी पदस्थापना जून 1981 में बतौर डीएसपी, सरगुजा की गई।
पुलिस की नौकरी रास नहीं आने पर उन्होंने पुन: शासन को अभ्यावेदन देकर नायब तहसीलदार की पुरानी नौकरी में लौटने की इच्छा व्यक्त की। शासन की अनुमति से समीर कुमार नाग 1986-87 में पुन: नायब तहसीलदार के रूप में पदस्थ हुए, परंतु उन्हें उचित वेतनमान, पदोन्नति नहीं मिली। इस पर उन्होंने स्टेट ट्रिब्यूनल के समक्ष 850-1988 याचिका दायर की।
ट्रिब्यूनल ने 23 अगस्त 1994 को आदेशित किया कि जिस दिनांक से श्री नाग नायब तहसीलदार के पद पर पुन: लौटे हैं, से लेकर याचिका निराकृत होने तक पदोन्नति तथा आर्थिक लाभ प्रदान किया जाए। ट्रिब्यूनल के आदेश का परिपालन नहीं होने तथा इस बीच जूनियर अधिकारियों की पदोन्नति होने के कारण श्री नाग ने रिव्यू डीपीसी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद उन्होंने इस मामले में छत्तीसगढ़ शासन को पक्षकार बनाने के लिए 7 मई 2002 को पुन: आवेदन प्रस्तुत किया। इस बीच 1994 से 2008 तक ट्रिब्यूनल के आदेशों का परिपालन नहीं होने पर उन्हें हाईकोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की।
प्रकरण की सुनवाई करते हुए जस्टिस सतीश कुमार अग्निहोत्री ने आदेशों की अवमानना के मामले में राज्य शासन पर 3000 रुपए जुर्माना किया। शासन को जवाब प्रस्तुत करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया गया है।
आयुक्त व सचिव जनसंपर्क को नोटिस >>
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस सतीश कुमार अग्निहोत्री की एकलपीठ ने जनसंपर्क संचालनालय छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत पदोन्नति प्रकरण पर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए आयुक्त वं सचिव जनसंपर्क को नोटिस जारी किया है। प्रकरण के अनुसार याचिकाकर्ता तपन मुखर्जी 1981 में जनसंपर्क विभाग की सेवा में सहायक जनसंपर्क अधिकारी के पद पर पदस्थ हुए।
14 अक्टूबर 1998 में उन्हें उप संचालक के पद पर पदोन्नत किया गया। राज्य गठन के बाद 10 अक्टूबर 2003 को संयुक्त संचालक के छह पदों पर पदोन्नति के लिए डीपीसी हुई, तो पांच पदों पर पदोन्नति की गई, परंतु तपन मुखर्जी को वंचित कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इसके खिलाफ आयुक्त जनसंपर्क के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया था कि जिन पांच अभ्यर्थियों को संयुक्त संचालक के पद पर पदोन्नत किया गया, उन सबमें वे वरिष्ठ हैं। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति प्रदान नहीं की गई। मौखिकतौर पर याचिकाकर्ता को बताया गया कि तत्कालीन कलेक्टर रायपुर ने उनके आचरण के विषय में प्रतिकूल टिप्पणी की है।
श्री मुखर्जी ने इस मामले में वरिष्ठ वकील कनक तिवारी, जितेंद्र पाली एवं मतीन सिद्दिकी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि राज्य शासन के नियमानुसार यदि किसी शासकीय सेवक के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी लिखी जाती है, तो उसे संसूचित किया जाए। चूंकि यह मामला वर्ष 2000-2001 का है और इस दौरान शासन ने अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो याचिकाकर्ता ने 2005 में हाईकोर्ट के समक्ष याचिका प्रस्तुत की। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का 3 महीने में निराकरण करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के उक्त आदेश के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन ने याचिकाकर्ता को सूचित किया कि भविष्य में जब कभी विभाग की डीपीसी होगी, उनके प्रकरण पर विचार किया जाएगा। इस मामले में उचित कार्यवाही नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने पुन: हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इस मामले में सचिव एवं आयुक्त जनसपंर्क को नोटिस दिया है।