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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़शहर के कुछ मंदिरों में सोमवार से नवरात्रों की शुरुआत की गई। इन मंदिरों में मुख्य रूप से सनातन धर्म मंदिर सेक्टर-23, प्राचीन शिवालय खेमपुरी-24 और श्री सरस्वती आश्रम सेक्टर-22सी आदि शामिल हैं। सनातन धर्म मंदिर के पुजारी पं. ओमप्रकाश ने बताया कि जिन लोगों ने सोमवार से नवरात्र के व्रत आरंभ किए उन्होंने प्रथम और द्वितीय नवरात्रों की पूजा एकसाथ की।
ब्रrा मुहूर्त में पूजा-अर्चना: इसी मंदिर के मुख्य पुजारी पं. लाखीराम भारद्वाज ने बताया कि ब्रrा मुहूर्त में पूजा-अर्चना शुरू हुई। सुबह 6.15 बजे घट स्थापना की गई। उसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। श्रीराम चरित मानस का पाठ भी इस अवसर पर शुरू किया गया जिसके तहतबाल कांड का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने बताया कि सुबह 6.00 बजे से ही श्रद्धालु चुनरी नारियल और मेवों का प्रशाद लेकर मंदिर आने लगे थे। शाम को पं. कविता कांत वाजपेयी द्वारा श्री रामकथा और भजन सुनाए गए।
रामकथाएं भी शुरू हुई: श्री दुर्गा मंदिर सेक्टर-41 में सुबह 6.00 बजे श्री दुर्गा पूजन किया गया। रात को वृंदावन से आए पंडित राम गोपाल शास्त्री द्वारा श्री राम कथा शुरू की गई, जो रामनवमी तक चलेगी। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. रमेश चंद्र मैठाणी ने बताया कि 14 अप्रैल को भंडारा किया जाएगा।
श्री गुग्गा माड़ी मंदिर सेक्टर-20 में सुबह रामायण का नवाह्न् पारायण पाठ किया गया। सुबह 10.00 बजे से दोपहर तक दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। पुजारी किशोरी लाल ने बताया कि मनवचन क्रम से जो लो दुर्गा पाठ करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। दोपहर बाद मंदिर में कीर्तन हुआ जो शाम की आरती तक चला। सेक्टर-47 स्थित श्री राम मंदिर में रामायण पाठ और रक्षेश्वर श्री राम मंदिर सेक्टर-35 में भी रामकथा का आयोजन किया गया। उक्त मंदिरों के रामायण और दुर्गा सप्तशती पाठ बैसाखी तक चलेंगे।
मां चंद्रघंटा: पूजा से मिटती बाधाएं
तीसरे नवरात्र में मां चंद्रघंटा के विग्रह का पूजन होता है। माथे पर अर्धचंद्र के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि मां युद्ध के लिए उद्यत हैं। शांति और कल्याण के स्वरूप वाली इस देवी का रंग स्वर्ण के समान है। चंद्रघंटा की कृपा से साधक अलौकिक वस्तुएं प्राप्त कर सकता है। इनके ध्यान से कल्याण और सद्गति प्राप्त होती है। इनकी पूजा से पाप और बाधाएं मिट जाती हैं। इनकी पूजा का मंत्र है:
पिंडज प्रवारुढ़ा चंडको पास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मत्थां चंद्रघंटेति विश्रुता।।