मुंबई.
जब पानी सर से उपर चला जाए तो जीना मुश्किल हो जाता है। अमिताभ बच्चन के लिए भी पिछले कुछ महिने ऐसे ही गुजरे हैं। मनसे नेता राज ठाकरे और हाल में ही शिनसेना सुप्रिमो बाल ठाकरे द्वारा लगातार आरोपों का प्रहार झेल रहे अमिताभ ने अब जबाव देने के बारे में सोच लिया है।
एक अखबार में दिए गए इंटरव्यू में अमिताभ ने अपने बड़े ही कड़े शब्दों में कहा मैं यह शहर छोड़कर की नहीं जाऊंगा। जिसे जो करना है कर ले। चाहे वे बोतलें तोड़े, मेरा पुतला जलाएं, मेरे घर के आगे मार्चा निकाले, मेरे फिल्मों के पोस्टर फांड़े या फिर मेरे फिल्म की स्क्रीनिंग को रोक दें। मैं यह मुंबई नहीं छोडुंगा।
अमिताभ ने कहा कि वे चाहे तो मुझे ड़डे मारे या फिर मीडिया में मेरे खिलाफ गतल अफवाह उड़ाएं। मुझे इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता।अमिताभ ने कहा कि मैं इस शहर के लिए बाहर वाला नहीं हूं। यह शहर मेरा उतना ही हैं जितना अन्य किसी का। मैं मुंबई में 1968 में आया था। मुझे यहां आने के लिए वीजा लेने की जरुरत नहीं है। यह शहर पिछले 40 सालों से मेरा घर है। यही पर मैने अपनी पहली कार खरीदी, अपना घर खरीदा और शादी की। मेरे दोनों बच्चें भी यही पैदा हुए, मेरे पोते पोती का जन्म भी यही हुआ है,मेरे माता-पिता ने अपने जीवन के अंतिम झण यही बिताए हैं। मुझे इस शहर ने नाम और शोहरत दिया है।
बाल ठाकरे ने सामना में अमिताभ और रजनीकांत की तुलना करते हुए कहा था कि अमिताभ को रजनीकांत से सीख लेते हुए जन्मभूमि से ज्यादा कर्मभूमि को महत्व देना चाहिए। इस बारे में पूछे जाने पर अमिताभ ने कहा कि मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरी तुलना रजनीकांत के साथ की गई। जहां तक बाल ठाकरे का प्रश्न है वे मेरे लिए पिता जैसे हैं और हमेशा रहेगें। मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया है कि जब बड़े बोलते हैं तो चुपचाप सुन लेना चाहिए।