सूरत
आईआईएम, अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद दो विद्यार्थी लाखों रुपए की नौकरी का प्रस्ताव ठुकराकर नन्हे-मुन्नों के लिए यहां एक अनोखा स्कूल चला रहे हैं। इस ‘मस्ती की पाठशाला’ में बच्चों को बंदिशों से परे अपने ढंग से पढ़ाई करने की आजादी है। वे चाहें तो पानी में छई-छपा छई करें, कागज फाड़ें, पेंसिल से कागज पर लकीरें खींचें या चाहें तो पढ़ते-पढ़ते सो जाएं।
आईआईएम से 2004 में एमबीए करने वाले वरदान और उनकी पत्नी अंकिता काबरा ने प्लेसमेंट के दौरान लाखों रुपए की नौकरी के ऑफर ठुकरा दिए और ‘फाउंटेन हेड’ प्री-स्कूल की नींव रखी। काबरा दंपती ने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में यह विचार आया था कि दुनिया में हर क्षेत्र में नित नए बदलाव आ रहे हैं, लेकिन शिक्षा का ढांचा अभी भी जस का तस है। इसी विचार के बाद उन्होंने प्ले ग्रुप, नर्सरी, जूनियर व सीनियर केजी और पहली कक्षा के बच्चों के लिए यह स्कूल खोलने का निश्चय किया।
सूरत ही क्यों :
सूरत में ही स्कूल शुरू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे तेजी से बढ़ता शहर है, लेकिन अच्छे स्कूलों की यहां काफी कमी है। मस्ती की इस पाठशाला में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का स्कूल में इतना मन लगता है कि रविवार को अवकाश होने पर वे निराश हो जाते हैं।