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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरीजिले में गड़रिया गिरोह के मारे जाने के बाद दहशत पूरी तरह समाप्त हो चुकी है लेकिन पाड़रखेड़ा रेलवे स्टेशन के ताले आज भी लगे हुए हैं। पांच साल पहले गिरोह के डर से जब रेलवे स्टाफ ने यहां रहने से इनकार कर दिया था तब इस स्टेशन को बंद कर दिया गया था। इस स्टेशन के बंद रहने का खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।
शिवपुरी से ग्वालियर जाते समय एक छोटे से रेलवे स्टेशन खजूरी के बाद दूसरा स्टेशन है पाडरखेड़ा, जो उस समय दयाराम रामबाबू दस्यु गिरोह का केन्द्र हुआ करता था और सारा इलाका उसकी दहशत से कांपता था। साथ ही रेलवे स्टेशन पर पदस्थ स्टोशन मास्टर और अन्य कर्मचारियों का खूली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया था, तभी वहां डच्यूटी दे रहे रेलवे के एक इंजीनियर का अपहरण कर लिया था और मारे दहशत के रेल कर्मचारियों मे काम करना बंद कर दिया था।
यही नहीं इस घटना से पाड़रखेड़ा के स्टेशन मास्टर ने काम करने से इनकार कर किया था और मजबूरन पश्चिम मध्य रेलवे के इस इस स्टेशन को बंद करना पड़ा था। इस घटना को हुए करीब पांच साल बीत गए हैं, लेकिन यह स्टेशन आज भी यात्रियों के लिए बंद है। हालांकि इस ताला बंदी से रेल पAशासन एवं कर्मचारियों पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन इसका खामियाजा क्षेत्रीय यात्रियों को जरूर भुगतना पड़ रहा है ।
यात्रियों की परेशानी
पश्चिम मध्य रेलवे के इस सिंगल रेलवे ट्रैक पर यात्री सुविधा के नाम पर कुल चार गाड़ियां चलती है, जिनमें से तीन पैसेंजर गाड़ियां हैं।
पाड़रखेड़ा स्टेशन के बंद हो जाने से ग्वालियर से आने वाली भिंड-बीना पैसेंजर गाड़ी को मोहना स्टेशन पर डेढ़ से दो घंटे तक खड़ा रहना पड़ता है, क्योंकि जब तक एक अन्य गाड़ी शिवपुरी