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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी नगरपालिका शहर केलोगों को पेयजल मुहैया कराने के लिए रोजाना 40 हजार रुपए खर्च कर रही है, फिर भी जल संकट की स्थिति गंभीर बनी हुई है । शहर के हर इलाके में लोग पानी संकट से जूझ रहे हैं। बच्चों से लेकर वृद्ध तक प्लास्टिक की कट्टी लेकर पानी ढोते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर रोजाना 600 टैंकर पानी कहां जा रहा है।
नगरपालिका ने गत एक अप्रैल से शहर के उन वार्डो में पेयजल का परिवहन करने के लिए निजी ठेकेदारों की मदद ली है, जहां पानी का घोर संकट है और लोग पानी के लिए तरस गए हैं। इस कार्य के लिए नगरपालिका ने 50 निजी टैंकर किराए पर लिए हैं। एक टैंकर पानी प्यासे इलाके में पहुंचाने के एवज में टैंकर संचालक को 80 रुपए का भुगतान किया जाता है।
इसके अलावा नगरपालिका के स्वयं के 10 टैंकर भी इस कार्य में जुटे हुए हैं। इस प्रकार यदि आंकलन करें तो रोजाना 60 टैंकर विभिन्न इलाकों में पानी पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। एक टैंकर रोजाना 10 चक्कर लगाता है। इस लिहाज से देखें तो प्रतिदिन 600 टैंकर पानी परिवहन करने का खर्च नगरपालिका वहन कर रही है, बावजूद इसके पानी की त्राहि-त्राहि मची हुई है।
शहर के पिछड़े इलाके करोंदी, फतेहपुर, लाल माटी, पुरानी शिवपुरी, कमलागंज, कृष्णपुरम कालोनी ही नहीं राजेश्वरी रोड, महल कालोनी, शंकर कालोनी, गुरुद्वारा क्षेत्र में जबर्दस्त पेयजल संकट है।
नपाध्यक्ष जगमोहन सिंह सेंगर से जब इस संबंध में बात की गई तो उनका जवाब था कि सभी टैंकर निश्चित स्थानों पर भरे जाते हैं और उन्हें फिर जलसंकट वाले इलाकों में खाली किया जाता है। श्री सेंगर का कहना था कि ये टैंकर पार्षदों के हवाले किए गए हैं और वे ही जरूरत के अनुसार पानी का वितरण करा रहे हैं। यदि ऐसा है तो पार्षदों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा किया जा सकता है।