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तेल पर नकेल

भोपालमहंगाई से परेशान जनता के लिए यह खबर राहत का सबब हो सकती है। खाद्य तेल के दाम गिरने लगे हैं। इसके साथ ही दाल, चावल और शकर की कीमतें भी कम होने की उम्मीद है। राजधानी में सोमवार को सोयाबीन तेल के दाम एक ही दिन में 16 रुपए प्रति किलो तक कम हो गए। मूंगफली का खुला तेल प्रति लीटर दो रुपए नीचे आया है, हालांकि इसके टिन का दाम अभी कम नहीं हुआ है, लेकिन जल्दी ही इसमें 25 से 50 रुपए की मंदी आ सकती है। पिछले कुछ महीने में खाद्य तेल की कीमत 30 फीसदी बढ़ी है।

बहरहाल, महंगाई पर काबू पाने के सरकारी प्रयासों को आंशिक सफलता मिलने लगी है। सोयाबीन तेल खुले में पांच अप्रैल को 74 रुपए किलो बिका था। सोमवार को इसमें सीधे 16 रुपए की मंदी के साथ 58 रुपए किलो के भाव बोले गए। मूंगफली तेल 77 से घटकर 75 रुपए बोला गया। हालांकि व्यापारी अभी इस बात पर असमंजस में हैं कि खाद्य तेल के दाम में और कितनी गिरावट आएगी

अनाज और शकर के दाम भी घटेंगे

खाद्य तेलों में सोमवार की गिरावट के बाद अब दाल, चावल और शकर में नरमी की संभावना जताई जा रही है। वायदा बाजार में सोमवार को चना का अप्रैल वायदा प्रति क्विंटल 95 रुपए लुढ़का और 2456 रुपए पर थमा। शकर कोल्हापुर के अप्रैल वायदे में 23 रुपए क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई और भाव 1412 रुपए बोला गया। वायदा बाजार में अप्रैल के नरम सौदों के चलते राजधानी में सोमवार को चना दाल थोक बाजार में पांच रुपए किलो टूटकर 31-34 रुपए पर आ गई जबकि उड़द धुली में कीमत तीन रुपए कम कर 32-39 बोली गई।

इससे पहले चना 32-39 और उड़द 35-42 रुपए किलो बिक रही थी। शकर भी थोक में 16 रुपए किलो है इसमें भी हल्की नरमी की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक चावल में अभी भाव स्थिर हैं लेकिन छत्तीसगढ़ और मालवा क्षेत्र से आवक बढ़ने पर इसकी कीमतें नीचे आएंगी।

नरमी की वजह

वायदा बाजार में रिफाइंड सोया तेल का अप्रैल कांट्रेक्ट प्रति 10 किलो 8.60 रुपए घट कर 560.85 रुपए हुआ। सरकार ने खाद्य तेलों की कीमतों को नीचे लाने के उपायों के तहत कच्चे तेल माल पर आयात शुल्क ४५ से घटाकर २क् प्रतिशत और रैपसीड पर ५५ प्रतिशत घटाकर २क् प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा केन्द्र सरकार ने खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए ब्राजील से सोया आयल आयात करने की योजना बनाई है। यहां यह बताना जरूरी है कि जून २क्क्६ में जब पाम तेल पर शुल्क ८७.५ प्रतिशत था और उसके बाद से आयात शुल्क जब जब कम किया गया, दाम घटने की बजाय बढ़ते ही गए।

वायदा बाजार को दोषी मानते हैं व्यापारी

व्यापारियों का कहना है कि सरकार को यदि खाद्य तेलों की कीमतों पर अंकुश लगाना है तो वह इसका वायदा बाजार में कारोबार तुरंत बंद करे और अपनी एजेंसियों के माध्यम से आयात करे। कारोबारियों का कहना है कि यदि सरकार ने सोयाबीन के तेल के आयात की तरफ ध्यान नहीं दिया तो साफ्ट आयल का सारा बोझ सरसों पर पड़ेगा और फिर आने वाले तीन-चार महीने में स्थिति काफी खराब हो सकती है।

-बहुत ही सोच समझकर फिलहाल देश के वायदा कामकाज में सोया तेल के भाव को जानबूझ कर नीचा रखा जा रहा है। इस माह के शुरु में इंदौर में सोया तेल ७४क् रुपए प्रति दस किलो पर था और सट्टेबाज फिर इसे योजनाबद्ध तरीके से घटाकर नीचे ले आए। इसका नुकसान यह हुआ कि विदेशों में भाव ऊंचे होने के कारण तेल का आयात नहीं हुआ और यहां पाइप लाइन खाली होती चली गई। आमतौर पर सोयाबीन का तेल पाइप लाइन में पांच से छह लाख टन रहता था, जबकि अभी स्थिति यह है कि यह स्टाक कुछ हजार टन का ही है। सोयाबीन तेल में यदि २क् प्रतिशत की कटौती की जाती है तो शिकागो के वर्तमान भावों की तुलना में यहां आने वाला तेल मौजूदा भावों की तुलना में चार रुपए प्रति किलो ऊंचा पड़ेगा। -चोइथराम वाधवानी, खाद्य तेल के थोक विक्रेता।





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