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दृष्टि बाधित भी विकलांग आरक्षण के हकदार

इंदौर.justiceहाई कोर्ट ने मूक बधिर और दृष्टि बाधितों को भी विकलांग आरक्षण का हकदार ठहराया है और उन्हें भी अस्थि बाधितों की तरह आरक्षण का लाभ देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में असफल करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के हजारों नि:शक्त लोगों को जीने की एक नई राह मिल गई है।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की सिंगल बैंच ने महेश्वर के निलेश सिंघल की याचिका पर सोमवार को यह फैसला सुनाया। शत प्रतिशत दृष्टि बाधित श्री सिंघल 1997, 1998, 1999 व 2000 की मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण हुए लेकिन आयोग ने दृष्टि बाधित होने के कारण उन्हें साक्षात्कार में आमंत्रित ही नहीं किया।

श्री सिंघल ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी ने कहा आयोग दृष्टिबाधित एवं मूक-बधिर श्रेणी के प्रत्याशियों के साथ भेदभाव कर नौकरी पाने के संवैधानिक एवं विधिक अधिकार से वंचित कर रहा है, जो विकलांग व्यक्ति अधिनियम 1995 का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिनियम के अनुसार विकलांग श्रेणी के तीनों वर्गो दृष्टि बाधित, मूक बधिर एवं अस्थिबाधित को तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। बावजूद इसके आयोग 1997 से दृष्टि बाधित व मूक-बधिरों को आरक्षण के अधिकार से वंचित कर रहा है।

‘संवैधानिक दायित्व पूरे करने में विफल रही सरकार’

14 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा विकलांग व्यक्ति अधिनियम की मंशा स्पष्ट है कि विकलांग व्यक्तियों को जीवन के हर क्षेत्र में स्थापित कर आगे बढ़ाने के लिए पूरे अवसर दिए जाएं। यह हमारे संविधान की मूल भावना व प्रस्तावना के अनुसार आवश्यक भी है। राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 38 के दायित्वों को पूरा करने में असफल रही है।

विकलांग व्यक्तियों के लिए अवसर सुरक्षित रखने का दायित्व पूरा नहीं कर पाई और विकलांगों को अधिकार न देकर उन्हें उनके विधिक अधिकार व सामाजिक न्याय से वंचित किया है। विकलांगों के अधिकार दया नहीं है। सरकार सभी विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करे कि भविष्य में रोजगार के अवसरों के लिए दृष्टि बाधित, आंशिक दृष्टि बाधित, मूक-बधिर सहित सभी प्रकार के विकलांगों के लिए पदों का निर्धारण सुनिश्चित किया जाए। विकलांगों की तीनों श्रेणियों को 1:1 के अनुपात में अथवा प्रदेश सरकार के खुद के दिनांक 31 मार्च 05 के परिपत्र अनुसार 2:2 के अनुपात में आरक्षण दे।





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