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टोंक में शिकारियों का गिरोह सक्रिय

टोंक. वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण आए दिन शिकारियों का गिरोह राष्ट्रीय पक्षी मोरों की हत्याकर उनका शिकार कर रहे हैं। एक माह में वन विभाग के आंकड़ों में आजतक 2८ मोरों की हत्या हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रतिदिन शिकारियों द्वारा मोरों की हत्याएं की जा रही है।

इसी प्रकार शिकार व मौतों का का सिलसिला जारी रहा तो जिले से जल्द ही राष्ट्रीय पक्षी की प्रजाति लुप्त हो जाएगी। पिछले एक माह से जिले में शिकारियों द्वारा राष्ट्रीय पक्षियों की हत्या करने का सिलसिला जारी है। ७ मार्च को पीपलू तहसील के ग्राम झिराना व रानोली क्षेत्र में भी २ मोरों कुत्तों के शिकार बन गए। वन विभाग भी इस बात को स्वीकार कर रहा है। पिछले वर्षो के मुकाबले इस वर्ष मोरों की हत्या का ग्राफ बढ़ा है और शिकारियों का गिरोह इनमें बागरिया, सांसी, कंजर, मोग्या व अन्य जाति के लोग शामिल है।

सोहेला वन नाके के प्रभारी हाजी मुमताज अहमद के अनुसार 23 मार्च को नगरफोर्ट थाना क्षेत्र के कचरावता ग्राम के जंगलों में शिकारियों ने 11 मोरों को जाल में फंसा कर उनकी गर्दने तोड़ कर हत्या कर दी। इस प्रकरण में गांव वासियों ने किशनलाल व उसका पुत्र धर्मराज बागरिया को मौके से ही पकड़ कर नगरफोर्ट पुलिस के हवाले कर दिया। इसी दिन दूनी क्षेत्र के ग्राम टोडा का गोठड़ा के जंगलों में भी शिकारियों ने 8 मोरों की जहरीला चुग्गा खिलाकर हत्या कर दी।

२५ मार्च को ग्राम भूरियावाली में 3 मोरों के शव मिले तथा २६ मार्च को इसी ग्राम क्षेत्र में 4 और मोरों के शव पाए गए। लगातार हो रही मोरों की हत्याओं के बावजूद भी वन विभाग के अधिकारी शिकारियों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे। पिछले 4-5 वर्षो में जिले में मोरों की संख्या 6 हजार से अधिक थी। वन विभाग के इस वर्ष के आंकड़ों में मोरो की संख्या 4 हजार 154 बताई गई है। इनमें मादाओं की 2 हजार 129 नरों की 1 हजार 557 तथा 468 बच्चे बताए गए हैं। इसी प्रकार मोरों की शिकारियों द्वारा हत्या होती रही तो मोर जैसी प्रजाति शीघ्र ही लुप्त हो जाएगी।





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