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‘संसदीय सचिव अब मंत्री नहीं’

जयपुर. संसदीय सचिव अब मंत्रियों की श्रेणी में नहीं रहेंगे। इसके लिए विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों में संशोधन किया जाएगा। विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण विश्नोई की अध्यक्षता में बनी समिति ने नियमों में संशोधन की सिफारिशें विधानसभा की रूल्स कमेटी को भेज दी हैं। इस कमेटी की अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रासिंह हैं।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा 24 दिसंबर को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रियों और संसदीय सचिवों की संख्या 30 के बजाय 33 हो गई। कांग्रेस ने इसे विधानसभा में और बाहर मुद्दा बनाते हुए मंत्रिमंडल विस्तार को गैर संवैधानिक बताया।

कांग्रेस ने निर्धारित संख्या से ज्यादा बनाए गए मंत्रियों अथवा संसदीय सचिवों को हटाने की मांग की थी। वर्ष 2003 में हुए संविधान संशोधन के बाद राज्य मंत्रिमंडलों में कुल सदस्य संख्या के 15 फीसदी से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं। वसुंधरा सरकार में 27 मंत्री और 6 संसदीय सचिवों सहित कुल 33 मंत्री हैं।

तीन दिन तक नहीं चल पाया था सदन >>
संसदीय सचिवों के मुद्दे पर कांग्रेस ने विधानसभा के बजट सत्र में तीन दिन तक कार्यवाही नहीं चलने दी थी। सत्र शुरू होते ही कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने संसदीय सचिवों को हटाने का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस का कहना था कि विधानसभा के नियमों में संसदीय सचिवों को मंत्री की परिभाषा में माना गया है। एक संसदीय सचिव ने मंत्री की हैसियत से वर्ष 2005 में सदन में विधेयक भी पेश किया। उसमें विधानसभा अध्यक्ष ने यह रूलिंग दी थी कि संसदीय सचिव मंत्रियों की परिभाषा में आते हैं। कांग्रेस की मांग थी कि या तो नियमों में संशोधन किया जाए या संसदीय सचिवों को हटाया जाए। इस पर कमेटी बनाई गई थी।

कौन-कौन थे कमेटी में >>
विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण विश्नोई की अध्यक्षता में बनी कमेटी में सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़, कानून मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी और पूर्व वित्तमंत्री प्रद्युम्नसिंह को शामिल किया गया था।

विश्नोई कमेटी की रिपोर्ट अभी मेरे सामने नहीं आई है, इसलिए नियमों में संशोधन को लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। रिपोर्ट आने और सिफारिशों को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
—सुमित्रासिंह, विधानसभा अध्यक्ष

कमेटी ने विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों में संशोधन की सिफारिश की है। वर्ष 2003 में संविधान संशोधन के बाद संसदीय सचिवों को मंत्रियों की परिभाषा में नहीं माना गया है। कुछ राज्यों ने विधानसभा नियमों में संशोधन कर लिए हैं, लेकिन राजस्थान में किन्हीं कारणों से यह संशोधन नहीं हो पाया था। इस भ्रांति की वजह से अनावश्यक विवाद हो रहा था।
—रामनारायण विश्नोई, उपाध्यक्ष राजस्थान विधानसभा

संसदीय सचिवों को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाया गया मुद्दा बिलकुल ठीक था। हम लगातार यही कह रहे थे कि विधानसभा में अभी जो नियम बने हुए हैं, उनके मुताबिक संसदीय सचिव मंत्री की परिभाषा में हैं। इस हिसाब से राज्य मंत्रिमंडल की संख्या 30 से ज्यादा हो रही थी, जो संविधान की भावना के खिलाफ है। अब सरकार नियमों में संशोधन को तैयार हो गई है तो कांग्रेस के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है।
—सी.पी.जोशी, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस





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