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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नक्सल इलाकों में तैनाती के लिए एसएसबी के 1000 जवानों की खेप मंगलवार की रात विशेष ट्रेन से रायपुर पहुंची। ट्रेन यूपी से आई। इसके रुकते ही स्टेशन इलाका छावनी में तब्दील हो गया। एसएसबी की छत्तीसगढ़ में यह दूसरी खेप थी।
एसएसबी की विशेष ट्रेन रात 8.30 बजे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी हुई। ट्रेन के खड़े होते ही हथियारबंद जवानों ने पूरी ट्रेन को सुरक्षा घेरे में ले लिया। बोगियों के चारों तरफ जवानों को तैनात किया गया। बाकी जवान बारी-बारी से शहर की ओर भोजन-पानी की तलाश में निकल पड़े।
कुछ बाजार की ओर घूमते दिखे और कुछ स्टेशन के आसपास होटल और रेस्टोरेंट्स में जम गए। रेलवे स्टेशन पर जवानों की ट्रेन और उनकी गतिविधियों को देखने यात्रियों की भीड़ लग गई। जवानों को तड़के बस्तर की ओर रवाना किए जाने की सूचना है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ को चार बटालियन देने की घोषणा की थी, जिसमें दो एसएसबी और दो सीआरपीएफ बटालियन शामिल है। एसएसबी की 1000 जवानों की पहली बटालियन महीनेभर पहले बस्तर को रवाना हो चुकी है। सीआरपीएफ की भी दो बटालियनें भी यहां आ चुकी हैं। अफसरों के मुताबिक अब इस अंतिम बटालियन के आने के बाद नक्सली इलाकों में जवानों की पर्याप्त संख्या हो जाएगी।
भोजन के लिए तरसे जवान
उत्तरप्रदेश से लगभग 24 घंटे का लंबा सफर तय कर रायपुर पहुंचे जवानों को रात में भोजन के लिए काफी भटकना पड़ा। जवानों का सामान ट्रेन से बाहर नहीं निकाला गया। भोजन के लिए सभी को स्टेशन के बाहर होटलों और रेस्टोरेंट्स में ही जाना पड़ा।
आउटर में डेढ़ घंटे फंसी रही ट्रेन
रेलवे अफसरों को दो घंटे पहले तक यह पता नहीं था कि विशेष ट्रेन आरएसडी यार्ड भेजना है या स्टेशन लाना है। इस वजह से जवानों से भरी ट्रेन मांढर रेलवे स्टेशन के आउटर में खड़ी कर दी गई। ट्रेन वहां डेढ़ घंटे से भी अधिक समय खड़ी रही। आउटर में भी जवानों का दल बाहर निकलकर खड़ी ट्रेन की निगरानी में लगा था।
डाग स्क्वाड से कुत्तों में हड़कंप
प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में एसएसबी का डाग स्क्वाड भी आया। एक बोगी की खिड़की से बाहर की ओर झांक रहे स्क्वाड के कुत्तों को देखकर प्लेटफार्म के कुत्ते भोंकने लगे। कुत्तों को अचानक भोंकते देख यात्रियों की नजर बोगी पर पड़ी। तेजतरार और हट्टे-कट्टे कुत्तों को देखने स्टेशन पर काफी देर कर मजमा भी लग गया।