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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नंदनवन का भालू ‘मोहन’ मंगलवार को शाम 4.30 बजे पिंजरे की जाली पर चढ़कर बाहर कूद गया। आजाद होने के बाद छलांग मारता हुआ भालू सीधे बच्चों के साथ मौज-मस्ती कर रहे लोगों के बीच पहुंचा और अफरा-तफरी मच गई। भारी भरकम भालू को देखकर लोगों के होश उड़ गए। हालात इतने बिगड़े कि वनकर्मियों को हिरणों के पिंजरे में घुसकर जान बचानी पड़ी। पूरे घंटेभर भालू उत्पात मचाता रहा। बाद में किसी तरह उसे घेरा गया।
भालू नंदनवन में इधर से उधर भागता रहा। वह जिधर जाता था, लोगों की चीखें गूंजने लगती थीं। बचाओ और भागों की चीखों से पूरा नंदनवन गूंजने लगा। भालू जितनी देर आजाद रहा, उतने समय तक नंदनवन में कोहराम मचा रहा। कुछ लोग भागते हुए सीधे नंदनवन से बाहर निकल गए और कुछ लोगों ने नदंनवन के भीतर बने स्टाफ क्वार्टर में घुसकर पनाह ली।
बड़ों की स्थिति देखकर बच्चे भी बिलखते रहे। पिजरें से रिहा होने की खुशी में भालू इतना उत्साहित था कि उसने कई पर्यटकों पर हमला करने की कोशिश की। अपनी मस्ती में उछलता कूदता भालू नंदनवन के प्रवेश द्वार तक पहुंच गया था। नंदनवन के प्रभारी केदार तिवारी ने स्थिति को भांपकर पहले ही गेट बंद करवा दिया था। इस वजह से बाहर नहीं निकल सका। गेट के बाहर खड़ी भीड़ अंदर का तमाशा देख रही थी। भालू ने उन पर भी हमला करने की गरज से छलांग लगाने की कोशिश की। नंदनवन के सभी पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के बाद इंचार्ज और रेंजर आर एन मिश्रा ने स्टाफ के साथ मिलकर भालू को जाल में फांसा।
भालू को डराकर पिंजरे में कैद करने के लिए बांस का उपयोग किया गया। आग भी जलाई गई। भालू शहद की लालच में झांसे में आया। तीन बड़े-बड़े बर्तन में शहद को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर रखकर उसे पिंजरे तक पहुंचाया गया। यह फामरूला कारगर साबित हुआ। भालू जैसे ही पिंजरे के पास पहुंचा, उसे आग दिखाकर डराया गया। भयभीत होकर भालू पिंजरे में घुस गया। घटना के 10 मिनट बाद ही इस बात की खबर डीएफओ दफ्तर सहित वन विभाग के मुख्यालय को दे दी गई थी। अफसरों के पहुंचने के पहले ही भालू को पिंजरे में कैद कर दिया गया था। भालू को फिलहाल छोटे पिंजरे में रखा गया है। उसे बार-बार ठंडे पानी से नहलाया जा रहा है।
कैसे हुआ आजाद
नंदनवन में भालू और शेर के पिंजरे एक कतार में हैं। पिंजरे के भीतर एक गहरा नाला है। जानवरों को पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ नाला उन्हें कैद रहने पर मजबूर भी करता है। पिछले दिनों शेरनी ने दो शावकों को जन्म दिया है। बच्चे पानी में डूब न जाएं, इस अंदेशे से नाले का पानी कम कर दिया गया है। नाले का पानी कम होने के कारण ही भालू नाला पार करके जालियों तक पहुंच गया और चढ़कर बाहर कूद गया।
नंदनवन में एक साल से
नंदनवन में आजाद होकर उत्पात मचाने वाला मोहन करीब एक साल पहले कटघोरा के जंगलों से लाया गया था। उस समय वह बच्च था। उसके साथ एक मादा भालू ‘मोहिनी’ भी लाई गई थी। दोनों को कुछ अर्सा पहले ही छोटे पिंजरे से निकालकर खुले में बड़े पिंजरे में रखा गया है। भालू के आजाद होने की खबर आस-पास के गांव में भी फैल गई थी। सैकड़ों लोग कौतूहल वश वहां पहुंच गए थे।
16 साल बाद हुई घटना
पिंजरे से भालू के आजाद होने की यह दूसरी घटना है। 1992 में भी एक भालू पिंजरे भाग निकला था। उस समय भोजन देने के लिए जब दरवाजा खोला गया था, तब भालू को मौका मिला था। उस समय भी भालू ने जमकर धमाचौकड़ी मचायी थी। वह नंदनवन की सरहद पार करके अटारी गांव तक पहुंच गया था। एक छत में जाल फेंककर उसे पकड़ा गया था।
पर्यटकों ने दिया था खतरे का संकेत
नंदनवन में मंगलवार को बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने गए बैजनाथपारा निवासी साजिद खान और अश्फाक कुरैशी ने भालू को जाली पर चढ़ते देख लिया था। उन्होंने वनकर्मियों को जाकर इस बात की खबर दी। पहले तो वन कर्मियों ने यह कहकर टालने की कोशिश की कि, यह तो रोजमर्रा की बात है। श्री खान ने जब दबाव डाला, तब खींजते हुए एक वनकर्मी भालू के पिंजरे के पास पहुंचा। उस समय तक भालू आधा लटक चुका था। वनकर्मी भी यह देखकर सकते में आ गया। उसे कुछ नहीं सूझा और पत्थर मारकर भालू को डराने की कोशिश की। दो-तीन बड़े पत्थर मारे। इससे भालू बौखला गया।