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गुरु पर शिकंजा नजर रखेंगे शिष्य

रायपुर. भगोड़े छात्रों की तरह आदतन गायब रहने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसने विभाग ने ढूंढा नायाब तरीका। पीडीएस की तर्ज पर छात्र करेंगे शिक्षक, हेडमास्टर और प्रिंसिपल के कामकाज की निगरानी। इसमें आम जनता का भी सहयोग लिया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के कामकाज में कसावट लाने के लिए निगरानी का नायाब तरीका निकाला है। निगरानी कोई और नहीं बल्कि वही छात्र करेंगे, जिनको शिक्षक पढ़ाते हैं। शिक्षक पढ़ाई किए बिना ड्यूटी से गायब हुए तो छात्र उनकी शिकायत जिम्मेदार अफसर से कर सकेंगे। शिकायत सही पाई गई तो शिक्षक पर कार्रवाई तय है।

यह अनोखी व्यवस्था नए सत्र से सभी स्कूलों में लागू की जाएगी। शिक्षा विभाग ऐसा साफ्टवेयर विकसित कर रहा है जिससे शिक्षकों और प्राचार्र्यो की उपस्थिति पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। राजीव गांधी शिक्षा मिशन की डायरेक्टर मनिंदरकौर द्विवेदी और उनकी टीम ऐसा साफ्टवेयर तैयार करने में जुटी है। साफ्टवेयर में प्रदेश के सभी स्कूलों, शिक्षकों, शिक्षाकर्मियों को सूचीबद्घ किया जा रहा है। हरेक को स्पेशल कोड अलाट किया जा रहा है।

रायपुर शिक्षा मुख्यालय में इसका कंट्रोल रूम होगा। इसमें चार-पांच टोलफ्री फोन नंबर होंगे। इन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। इन नबरों पर फोन करके कोई भी छात्र या व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकेगा। इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं लगेगा। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा और उसे कंप्लेंट नंबर दिया जाएगा।

शिकायत के आधार पर विभाग यह पता लगाएगा कि किस गांव और स्कूल का कौन सा शिक्षक ड्यूटी पर नहीं आया या पढ़ा नहीं नहीं रहा? कंट्रोल रूम का आपरेटर शिकायत के आधार पर स्कूल और शिक्षक के कोड का मिलान कर आरोपी की पहचान करेगा। इसकी जानकारी नेटवर्क के जरिए तुरंत संबंधित इलाके के बी्ओ या डीईओ को दी जाएगी। स्क्रीन पर इसका खुलासा होते ही अफसर सक्रिय हो जाएंगे। अफसरों ने दावा किया कि तीन दिन में शिकायत का निराकरण कर शिकायतकर्ता को इसकी रिपोर्ट दी जाएगी। इसके लिए बीईओ और डीईओ दफ्तरों को पहले से ही कंप्यूटराइज्ड किया जा चुका है।

विभाग के लगभग 90 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है। बाकी में जल्दी ही इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। कंट्रोल रूम से सभी डीईओ और बीई्ओ कार्यालयों और स्कूलों को ब्राडबैंड नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। इस वजह से पलक झपकते ही दूरदराज के इलाकों की शिकायत राजधानी पहुंच जाएगी।

मिलीभगत की गुंजाइश नहीं

अफसरों का मानना है कि नए प्रयोग से आरोपी शिक्षक या जांचकर्ता अधिकारी की मिलीभगत कामयाब नहीं हो सकेगी। केस रफा-दफा नहीं किया जा सकेगा। इससे भविष्य में भी उस शिक्षक पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

क्यों पड़ी जरूरत?

एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि गैरशिक्षकीय काम से औसतन 11-12 फीसदी शिक्षक स्कूलों में नहीं मिलते। विभाग की जानकारी में लगातार यह बात आ रही है कि स्कूलों में आदतन गायब रहने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ रही है। इससे नतीजों पर असर तो पड़ ही रहा है विभाग शिक्षकों की बीमारी से खासा चिंतित है। अफसरों के दौरे के दौरान भी शिक्षक स्कूलों में नहीं मिलते। एक काम के लिए वे दो-तीन दिन तक गैरहाजिर रहते हैं।

शत-प्रतिशत उपस्थिति होगी-शिक्षा सचिव

शिक्षा सचिव नंदकुमार ने दावा किया कि नए प्रयोग से स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो जाएगी। इसकी वजह यह कि जनता की नजर उन पर होगी। शिक्षकों व प्रिंसिपलों के बाद बीईओ और डीईओ की मानीटरिंग करने इस सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। नए सेशन से इसे प्रदेशभर में लागू कर दिया जाएगा।





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