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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
नए मास्टरप्लान शहर और आउटर के गांवों को शामिल कर बनाया गया है। अभी शहर 6180 हेक्टेयर में फैला हुआ है। मास्टरप्लान में इसे 15676 हेक्टेयर तक फैलाने का प्रस्ताव था। संशोधन के बाद इसे सीधे 16000 हेक्टेयर कर दिया गया। शहर को छह निवेश क्षेत्रो में बांटा गया है।
दक्षिण-पूर्व दिशा में सबसे ज्यादा आपत्तियां थीं और यही सर्वाधिक संशोधन हुए हैं। प्लान के मुताबिक आवासीय क्षेत्र में भविष्य में आबादी को देखते हुए 200 हेक्टेयर इजाफा किया गया है। प्रस्ताव में इसे 7660 हेक्टेयर करने का जिक्र था। संशोधन कर इसे 7860 हेक्टेयर कर दिया गया। संशोधन के बाद जो स्थिति सामने आई हैं, उसके मुताबिक शहर तीन ओर 41 गांवों में बढ़ेगा।
आबादी की समस्या को देखते हुए रायपुरा,बोरिया खुर्द की प्रस्तावित रिंगरोड से लगी जमीन का बड़ा हिस्सा एग्रीकल्चर से बदलकर आवासीय कर दिया गया है। खासकर सड़क से 300 मीटर दूर तक मकान बनाए जा सकेंगे। इसके अलावा बोरियाखुर्द, कांदुल रोड, काठाडीह रोड सहित इससे लगे काफी हिस्से में लोग घर बना सकेंगे। पहले इसे ग्रीन लैंड प्रस्तावित किया गया था। इसी तरह डूंडा से डूमरतराई तक प्रस्तावित रिंगरोड के आसपास भी आवासीय क्षेत्र बना दिया गया है।
शहर की 60 प्रतिशत आबादी 282 गंदी बस्तियों में रहती है। इनके लिए 2021 में 4 लाख 18 हजार मकानों की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि खम्हारडीह, दलदल सिवनी, मोवा, डूंडा, लभांडी, अमलीडीह, देवपुरी, रायपुरा, भाठागांव और डूमरतराई का काफी हिस्सा आवासीय प्रयोजन के लिए सुरक्षित किया गया।
मास्टर प्लान का प्रकाशन 12 अक्टूबर 2007 को हुआ। इसके बाद एक महीने तक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए। इनकी सुनवाई के बाद मास्टर प्लान का संशोधन किया गया है। 5 अप्रैल को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। मंगलवार को नगर एवं ग्राम निवेश के दफ्तर में इसका नक्शा लगाया गया है।
जनसुविधाओं में भारी कटौती >>
शहर बहुत अधिक अव्यवस्थित है। मास्टरप्लान में सार्वजनिक, अर्ध शासकीय और सांस्कृतिक प्रायोजन के लिए पहले 9.09 प्रतिशत क्षेत्र रखा गया था। संशोधन कर इसे 8.5 प्रतिशत कर दिया गया है। डूमरतराई के पास धमतरी रोड से लगे बड़े हिस्से को विशेषीकृत रखा गया है। इसके पहले इसका लैंडयूज आवासीय था।
अटारी के पास निजी इंजीनियरिंग कालेज के लिए काफी जमीन छोड़ी गई है। शैक्षणिक परिसर को ध्यान में रखते हुए इसे एग्रीकल्चर से सार्वजनिक उपयोग के लिए संशोधित किया गया। इसी तरह सोनडोंगरी में विशेषीकृत क्षेत्र छोड़ा गया है। आमोद प्रमोद में भी दो प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। पहले यह 12.52 प्रतिशत प्रस्तावित था, जिसे घटाकर 10.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
रिंगरोड के लिए सर्वे होगा >>
मास्टर प्लान में सबसे ज्यादा विवादित मुद्दा रायपुरा गांव का रहा। वहां प्रस्तावित रिंगरोड क्रमांक चार गांव के बीच से गुजर रहा है। इससे गांव दो भागों में बंट जाएगा। गांव के कई मकानों को भी उजाड़ना पड़ेगा। इस आपत्ति पर विभाग ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। मास्टर प्लान में इसे यथावत रखा गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग के संचालक एसएस बजाज ने बताया कि इसके विकल्प की तलाश की जा रही है। रायपुर विकास प्राधिकरण को इसके सर्वेक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद वैकल्पिक रोड या फिर व्यवस्थापन पर विचार किया जा सकता है। इस तरह का सर्वे रिंग रोड नंबर दो और तीन का भी होगा।
संशोधन की गुंजाइश कम >>
विभाग को 1088 आपत्तियां मिली थीं। विभाग का दावा है कि इनमें से 60 फीसदी आपत्तियों का निराकरण किया गया है। इतनी अधिक संख्या में पहली बार संशोधन किया गया है। अब मास्टर प्लान लागू होने के बाद संशोधन की गुंजाइश कम है। यदि बहुत आवश्यक हुआ तो नगर एवं ग्राम निवेश की धारा 23 (क) के तहत संशोधन किए जा सकते हैं। रायपुरा में रिंगरोड की समस्या इसी धारा के तहत सुलझाई जा सकती है।
अगले महीने मिलेगी किताब >>
संशोधन के बाद मास्टरप्लान की किताब का प्रकाशन किया जाएगा। इसमें एक महीने का समय लगने की संभावना है। इसमें सभी बदलाव दर्शाए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसकी 1000 प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी। अगले महीने से इसे विक्रय किया जाएगा। इसी तरह खसरा नंबर के हिसाब से परिवर्तन को 8-10 दिन में जारी किया जाएगा। नगर निवेश दफ्तर में यह लोगों के अवलोकन के लिए रखा जाएगा।
अबूझ पहेली >>
मास्टरप्लान के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद इसमें हुए बदलाव को जानने लोगों में काफी उत्सुकता रही। नगर एवं ग्राम निवेश के दफ्तर में दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। लेकिन विभाग ने केवल एक छोटा सा नक्शा लगाकर औपचारिकता निभा दी। उसमें स्पष्ट नहीं हो रहा कि कहां क्या बदलाव हुए हैं। लोग सिर खपाते रहे कि उनकी आपत्तियों का क्या हुआ? विभाग ने खसरावार जमीन नहीं दिखाई है जिससे मास्टर प्लान संशोधन के बाद भी अबूझ पहेली बना रहा। पुरानी बस्ती के राज मल्होत्रा ने कहा कि मास्टरप्लान का संशोधन समझ नहीं आ रहा है। विभाग ने केवल औपचारिकता पूरी की है। आपत्तियां कूड़े में डाल दी गई हैं।
राजेश अग्रवाल ने अमलीडीह में जमीन का लैंडयूज आवासीय करने आवेदन दिया था। उनके मुताबिक संशोधन किया गया है, लेकिन रायपुरा के पास की आपत्ति को नजर अंदाज कर दिया गया है। इसी तरह कई लोगों की शिकायत रही। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने नक्शे की कापी नगर निगम और कलेक्टोरेट परिसर में नहीं लगाई। इसलिए लोगों को परेशानी हुई। नगर निवेश विभाग में नक्शे से संबंधित जानकारी देने वाला कोई नहीं था।
सड़क किनारे मकान-दुकान >>
नए प्लान में वाणिज्यिक क्षेत्र को 60 हेक्टेयर की वृद्घि कर इसे 1290 से 1350 हेक्टेयर कर दिया गया। संशोधन के बाद यह 8.07 से बढ़कर 8.25 प्रतिशत हो गया। इसमें खासकर मिश्रित क्षेत्र को बढ़ाया गया है। रिंगरोड नंबर एक में रायपुरा चौक से टाटीबंद की ओर बाईं दिशा में लंबा हिस्सा पहले आवासीय था। इसे संशोधित कर मिश्रित उपयोग कर दिया गया है।
देवपुरी के पास मुख्य मार्ग क्रमांक 24 और धमतरी रोड जहां मिलेगा, वहां आवासीय क्षेत्र को बदलकर मिश्रित किया गया है। भनपुरी तिराहे के पहले कुछ क्षेत्र को मिश्रित में परिवर्तित किया गया है। शहर के भीतर सड़कों के किनारे व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हो गया है। मास्टरप्लान में मध्यक्षेत्र के दबाव को कम करने का प्रयास किया गया था। सभी महत्वपूर्ण सड़कों में दोनों तरफ 150 मीटर तक भूमि का मिश्रित उपयोग तय किया गया, ताकि लोग उसका उपयोग मकान, दुकान सहित अन्य प्रायोजनों के लिए कर सकें।
औद्योगिक इलाके कम >>
शहर के भीतर औद्योगिक दबाव को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। वर्तमान में 13.2 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक प्रायोजन के लिए उपयोग किया जा रहा है। शहर के क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ औद्योगिक प्रायोजन को कम किया गया है। नए मास्टर प्लान में इसे 9.2 प्रतिशत तक सीमित रखा गया। संशोधन के बाद इसमें और कमी कर दी गई है। अब इसके लिए 9.1 फीसदी क्षेत्र सुरक्षित है।
30 नई सड़कें >>
मास्टरप्लान में केवल लैंडयूज तय किया गया है। इसमें शहर की 56 सड़कों को प्रमुख मार्ग माना गया है। 30 नईं सड़कें डेवलप करने का प्रस्ताव है। इनकी चौड़ाई 30 से 150 फीट होगी। 76 सड़कों के चौड़ीकरण का भी प्रस्ताव है। इन्हें बनाने के लिए जोनल स्तर पर प्लानिंग की जाएगी। जिसमें सड़कों की डिजाइन तय होगी। इसमें प्रस्तावित 46 चौक-चौराहों पर सिग्नल और यातायात की बाधाएं दूर करने के लिए 15 ओवरब्रिज की डिजाइन की जाएगी। पेयजल सप्लाई, सीवरेज सिस्टम, ठोस अपशिष्ट और ड्रैनेज के लिए दूरगामी विस्तार से योजना बनेगी। तालाबों के आसपास ग्रीनलैंड को नहीं बदला गया है।