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कम कीमत पर तेल देगी केंद्र सरकार

बिलासपुर.oilखाद्य तेल की बढ़ती कीमत ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। महंगाई रोकने के लिए केंद्रीय स्तर पर हर रोज चल रहे विचार मंथन के बीच केंद्र सरकार ने अब निम्न व मध्यम वर्ग के परिवारों को कम कीमत पर तेल उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके लिए राज्य सरकार को हर माह एक लाख टन खाद्य तेल उपलब्ध कराया जाएगा। एक किलो व आधा किलो के पैकेट में बंद इस तेल की बिक्री सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों में की जाएगी।

तेल की महंगाई से जूझ रहीं गृहिणियों के लिए यह राहत का सबब हो सकता है कि उन्हें अब सरकारी राशन दुकानों में कम कीमत पर खाद्य तेल मिल सकेगा। आम बाजार से इस तेल की कीमत 12 से 20 रुपए तक कम होगी। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को अनुदानित कीमत पर खाद्य तेल (पाम आयल) प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।

एक व आधा किलो के पैकेट में बंद इस तेल की आपूर्ति इस माह से लेकर साल भर तक जरूरत के मुताबिक की जाएगी। इसके लिए पीएसयू नामक एजेंसी तय की गई है, जो इंटरनेशनल मार्केट से तेल का आयात कर छत्तीसगढ़ को एक लाख टन तेल देगी। केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डा. जॉय आई किनाथ ने राज्य सरकार को इस आशय का पत्र भेजा है। इस योजना को लागू करने के लिए राज्य स्तर पर पहल भी शुरू कर दी गई है।

स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा बीपीएल व एपीएल कार्डधारियों की जानकारी राज्य शासन को भेजी जा रही है, जहां से पूरे राज्य का आंकड़ा केंद्रीय मंत्रालय को भेजा जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार रहेगी और इस तेल का वितरण किस माध्यम से किया जाएगा, यह भी उसे तय करना है।

बताया जा रहा है कि खाद्य तेल की बिक्री शासकीय उचित मूल्य दुकानों के अलावा अन्य संस्थाओं के माध्यम से भी की जा सकती है। इस तेल पर केंद्र 20 प्रतिशत सब्सिडी देगा, जिससे इसकी कीमत 12 से 15 रुपए तक कम हो जाएगी। इसके अलावा आयात शुल्क में कमी लाने पर यह छूट 20 रुपए तक हो सकती है। इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव का असर तेल की कीमत पर पड़ेगा। तेल के पैकेट पर केंद्र सरकार का लेबल व सब्सिडी का प्रतिशत अंकित होगा। उल्लेखनीय है कि जिले में एक लाख 70 हजार एपीएल व तीन लाख 70 हजार बीपीएल परिवार हैं। इनमें से किसी एक वर्ग को या फिर दोनों वर्गो को योजना का लाभ मिल सकता है।

अगले साल भी बढ़ सकती है योजना >>
योजना की सफलता के बाद इसे अगले वर्ष तक के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। केंद्र की यह योजना फिलहाल 2008-09 के लिए है। हर महीने अलग-अलग आबंटन राज्य सरकार के लिए जारी किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जरूरतमंद परिवारों को इससे लाभ मिला तो वर्ष 2009-10 या इससे भी आगे के लिए योजना का विस्तार किया जा सकता है।

10 साल पहले मिलता था तेल >>
पीडीएस की सरकारी राशन दुकानों में खाद्य तेल की बिक्री करीब 10 वर्ष पहले की जाती थी। बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए एक बार फिर से यह प्रयोग किया जा रहा है। राशन दुकानों में तेल उपलब्ध कराने के पीछे केंद्र का एकमात्र उद्देश्य है कि निम्न व मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगाई से निजात मिल सके।

27 दिन लगे पत्र आने में >>
आम जनता से जुड़ी इस योजना का पत्र दिल्ली से रायपुर कब पहुंचा, यह तो पता नहीं, लेकिन बिलासपुर पहुंचने में 27 दिन लग गए। केंद्रीय मंत्रालय ने यह पत्र 18 मार्च को राज्य शासन के लिए जारी किया था। राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संयुक्त संचालक द्वारा इसे 7 अप्रैल को डिस्पेच किया गया है। उन्होंने योजना शुरू करने के लिए जिम्मेदार अफसरों के नाम व फोन नंबर भी मांगे हैं।





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