बाड़मेर. भादरेस गांव में निर्माणाधीन राजवेस्ट पावर प्लांट की पहली विद्युत उत्पादन इकाई के लिए चीन से आयातित बॉयलर ड्रम पहुंच चुका है। गुरुवार को इस 63 टन वजनी बॉयलर ड्रम को 49 मीटर की ऊंचाई पर चीनी इंजीनियरों के निर्देशन में स्थापित किया जाएगा।
क्या होगा इस बॉयलर ड्रम से >>
इस बायलर ड्रम में प्रति घंटे 400 मैट्रिक टन भाप पैदा होगी। विद्युत इकाई के लिए बायलर ड्रम महत्वपूर्ण उपकरण होता है। इस लिहाज से इसे स्थापित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्लांट की पहली इकाई से अक्टूबर में विद्युत उत्पादन शुरू करने की योजना है। इसकी प्रस्तावित आठों इकाइयों के उपकरणों के लिए चीन की कंपनी डांगफाग इलेक्ट्रिक कारपोरेशन से करार किया गया है। इसकी पहली खेप में 2.2 मीटर चौड़ा व 15 मीटर लंबा बायलर भेजा गया है।
तीस साल तक पैदा होगी बिजली >>
भादरेस में स्थापित हो रहे पावर प्लांट से तीस साल तक बिजली पैदा होगी। विशेषज्ञों के आंकलन के मुताबिक कपूरड़ी में 235 मिलियन टन लिग्नाइट के भंडार हैं, जो पावर प्लांट की तीस साल की जरूरत के लिए पर्याप्त हैं। यहां 180 मीटर की गहराई तक लिग्नाइट भंडार हैं। विद्युत उत्पादन के लिए निर्माणाधीन आठ इकाइयों पर 4807 करोड़ की लागत आएगी, जबकि लिग्नाइट खनन पर 467 करोड़ खर्च करने होंगे। इसमें रोजाना 22 हजार मैट्रिक टन लिग्नाइट की जरूरत होगी।
यह आएगी बिजली की लागत >>
राजवेस्ट के पावर प्लांट से 2.27 रुपए की लागत में प्रति यूनिट बिजली पैदा होगी।
दूसरे स्थानों से कोयला लाने की कवायद >>
बाड़मेर जिले में लिग्नाइट दोहन के प्रस्तावित स्थानों पर ग्रामीणों के विरोध के चलते राजवेस्ट पावर प्लांट की पहली इकाई के लिए कोयले की उपलब्धता में देरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में राजस्थान राज्य खनिज विकास लिमिटेड से दूसरे स्थानों से लिग्नाइट उपलब्ध कराने पर बातचीत चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर एक माह के अंदर भूमि उपलब्ध हो जाती है तो यहां पर लिग्नाइट का खनन कर लिया जाएगा, ऐसा नहीं होने पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी।
पहली इकाई के लिए चीन से मंगाया गया बॉयलर भादरेस पहुंच चुका है। इसे दस अप्रैल को स्थापित किया जाएगा। पहली इकाई से अक्टूबर में विद्युत उत्पादन शुरू होगा।
—अजय मंदाना,उप महाप्रबंधक, राजवेस्ट पावर प्लांट