जोधपुर.
तीन सौ चौदह फुट लंबी जन्म कुंडली! क्यों चौंक गए ना। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में करीब सौ वर्ष पुरानी एक ऐसी जन्म पत्री संरक्षित है। आमतौर पर एक व्यक्ति की इतनी बड़ी कुंडली की बात कहीं रिपोर्ट नहीं हुई है। भाग्य बताने वाली यह कुंडली 1905 में बनी थी। इसमें प्राकृतिक अनार की कलम से धार्मिक सभ्यता को भी चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। यह कुंडली एक महिला की है।
कुंडली का प्रचलन हर घर में काफी उपयोगी माना जाता है। समय के बदलते परिवेश में कागजों के माध्यम से भाग्य दर्शाने वाली जन्म पत्री दिन-ब-दिन छोटी होने के बाद कंप्यूटर में सिमट गई है। लेकिन प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में मौजूद 1905 ईस्वी की 314 फुट लंबी कुंडली जिसे देखकर हर कोई आश्चर्य मे पड़ सकता है।
यश कंवरी की है यह कुंडली >>
औशान सिंह की पुत्री यश कुंवरी की इस कुंडली की लंबाई 314 फुट और चौड़ाई नौ इंच है। इस जन्म पत्री में विभिन्न भाव कुंड, लाभ कुंड, दशम भाव, भाग्य, शत्रु भाव कुंडलिका, संतान भाव कुंडली, तुला लग्न, सुख भाव कुंडाली, तुला लग्न कुंडाकि, सहज भाव, धन भाव, कष्ट गणित दृष्टि, मैत्री प्रयोजन माह, केतु लग्न, राहुल लग्न, शनि दृष्टि, शुक्र भाव, मृग भाव चलित, गुरुभाव कुंडली, बुध भाव, मंगल स्वरूप, सुर्यलग्न, गृहगोचर, फलचक्र के साथ जीवन के कई चक्रों का उल्लेख किया हुआ है।
श्री गणोश के साथ शुरुआत >>
वृहद आकार की जन्म पत्री की शुरुआत में महा गणाधिपतय नम: को चित्र के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके साथ ही कुंडली में सुंदर बेलबूटों को बॉर्डर पर उकेरने के साथ राशियों के अलग-अलग स्वरूपों को हाथी, घोड़ा, शेर, भैंसा के साथ विभिन्न पशुओं के भाव व दशाओं का उल्लेख किया गया है। प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के अन्वेषक डॉ. कमल किशोर सांखला ने बताया कि इस तरह की जन्मपत्रियों में 1879 ईस्वी की 90 फुट लंबी जन्म पत्री यशराज के पुत्र चैनराज और 1882 ई. में बनी चतुभरुज आत्मज नाथाजी की 90 फुट लंबी कुंडली विभाग के संग्रहालय में मौजूद है।
भारत में इतनी बड़ी जन्म कुंडली के होने की बात कभी सुनी नहीं। हमारे यहां मौजूद इस प्राचीन कुंडली का होना प्रतिष्ठान के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
—वीणा लाहोटी, निदेशक, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर
व्यक्ति का भविष्य कैसा होगा इसे दर्शाने वाली कुंडली हर किसी के लिए उपयोगी है। प्राचीन समय में बनी डेढ़ से दौ सौ फुट बड़ी कुंडली तो मेरे पास मौजूद है लेकिन 314 फुट की इतनी बड़ी जन्म पत्री के बारे में पहली बार ही सुना है।
—पंडित रमेश द्विवेदी