बीकानेर. जलवायु में चल रहे परिवर्तन के दौर में मानसिक रोगियों में उन्माद की प्रवृत्ति बढ़ रही है। पीबीएम अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 रोगी पहुंच रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से मानसिक परिस्थितियों में बदलाव आता है। उदास रोगी जोश में आने लगते हैं। सर्दियां समाप्त होने के बाद जैसे-जैसे गर्मी तेज होगी। रोगियों में उन्माद बढ़ने लगेगा। उनमें उत्तेजना उत्पन्न हो जाएगी। मौसम में बदलाव के साथ ही यह उन्माद धीरे-धीरे कम हो जाएगा।
पीबीएम अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. के.के.वर्मा ने बताया कि उन्माद के रोगियों का उपचार फोटो लाइट थैरेपी से किया जा रहा है। एक बंद कमरे में तेज रोशनी के बीच रखने से ऐसे रोगियों को ठीक किया जा सकता है लेकिन रोगी को दवाइयां भी लेनी पड़ती है। बहुत अधिक ठंड और गर्मी तीव्रता को बढ़ाती है।
उन्होंने बताया कि शरीर की रासायनिक व आणविक संरचना पृथ्वी के तापमान पर निर्भर करती है। मौसम में बदलाव के कारण कुछ लोग अधिक तो कुछ कम खुश होते हैं। वर्तमान में उन्माद के रोगी बढ़ रहे हैं। गर्मी तेज होने पर ऐसे रोगियों की संख्या सौ से अधिक हो जाएगी। जबकि सर्दियों में अवसाद के रोगी बढ़ जाते हैं।
मानसिक रोग विभाग के आउटडोर में प्रतिदिन औसत 100 रोगी पहुंचते हैं। इनमें 20-25 रोगी उन्माद के शिकार हैं। इनके उपचार की विशेष व्यवस्था की गई है। रोगी के साथ आने वाले परिजनों को बताया जाता है कि इस प्रकार के रोगी के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाए। उन्माद की स्थिति में रोगी के साथ प्यार से पेश आना जरूरी है नहीं तो वह उत्तेजित होकर किसी भी तरह की हरकत कर सकता है।