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खेती के लिए ‘बार्डर’ पर जाएंगे पूर्व सैनिक

बीकानेर. पूर्व सैनिकों को अब फिर बार्डर पर जाना पड़ेगा क्योंकि उपनिवेशन विभाग ने उन्हें तोहफे के रूप में जो मुरबे आबंटित किए हैं वे बार्डर एरिया के काफी नजदीक हैं। सैनिकों की चिंता यह है कि पहले नौकरी के लिए परिवार छोड़ा और वहां खेती के लिए जमीन मिल गई। कमांड के नाम पर मिली इस सूखी भूमि को देखकर पूर्व सैनिक की आंखों में पानी आ रहा है।

अपने परिवार से दूर बार्डर पर तैनात रहने का गौरव हर सैनिक को होता है और उस सैनिक पर पूरे देश को नाज होता है लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद सैनिक की इच्छा ऐसी जगह बसने की होती है जहां वह अपना शेष जीवन परिवार के साथ बिता सके। शायद उपनिवेशन विभाग को यह रास नहीं आया और भूमि आबंटन के नाम पर पूर्व सैनिकों को फिर ‘बार्डर’ भेज दिया गया।

विभाग ने पूर्व सैनिकों को जैसलमेर के नाचना के पास ऐसी जगह मुरबा आबंटित किए जहां पीने के लिए भी पानी टैंकरों से पहुंचाया जाता है। बीएसएफ का काफी पैसा सिर्फ पानी के नाम पर खर्च होता है तो आबंटित भूमि पर खेती के लिए पानी कहां से और कैसे पहुंचेगा यह अभी भी एक सवाल बना हुआ है।

10 से 15 पूर्व सैनिकों को तो मुरबे बार्डर से सिर्फ एक किलोमीटर के करीब आबंटित किए गए हैं जहां धोरों के अलावा कुछ और नजर नहीं आता। भूमि देने के तोहफे के नाम ऐसी भूमि आबंटित की गई जहां खेती होना फिलहाल संभव नहीं है। ऑपरेशन पवन में शामिल पूर्व सैनिकों के लिए करीब 15 मुरबे आरक्षित कर दिए गए थे लेकिन अंत में वे सिविलियन को आबंटित कर दिए गए।

नगर विकास न्यास के पूर्व चेयरमैन सोमचंद्र सिंघवी ने तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त (आबंटन अधिकारी) गणपतलाल सुथार को इस संबंध में पत्र भी लिखा था लेकिन विभाग सिंघवी के पत्र का जवाब नहीं दे पाया। खानापूर्ति के नाम पर सिंघवी से यह कहा गया कि डीसी नाचना को पत्र लिख दिया गया है। सिंघवी भी पूर्व सैनिक हैं और उनको बार्डर से 500 मीटर की दूरी पर भूमि आबंटित की गई जहां फिलहाल पानी पहुंचना मुश्किल है।

सरकार ने नहर तो बना दी लेकिन रेत के टीलों में खे नजर नहीं आ रहे हैं। पूर्व सैनिकों को भूमि नहर के टेल पर आबंटित की गई है जबकि सरकार व विभाग को यह बात भली-भांति मालूम है कि टेल पर पानी पहुंचाना रेगिस्तान में कुआं खोदने के बराबर है।

नहर-वितरिकाओं के मध्य के किसानों को ही पूरा पानी नसीब नहीं हो रहा है। दिनोंदिन पानी की कमी होती जा रही है। ऐसे में पूर्व सैनिकों को आबंटित किए गए मुरबे कमांड होने के बाद भी अनकमांड की दशा में हैं।

जिन पूर्व सैनिकों ने अभी कब्जा नहीं लिया है उनके मुरबे बिना विनिमय समिति में लाए ठीक किए जा सकते हैं लेकिन जिन्होंने कब्जा ले लिया है उनकी भूमि विनियम समिति में रखकर ही बदली जा सकती है। ये मौका न सिर्फ पूर्व सैनिकों को है बल्कि सामान्य आबंटी को भी है। रही बात ऑपरेशन पवन के आरक्षित मुरबों की तो वह फाइल देखनी पड़ेगी। बिना देखे कुछ नहीं कह सकता।
-डॉ.के.के.पाठक, आयुक्त उपनिवेशन विभाग





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