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डबल मर्डर: कातिल पर कसा शिकंजा

अजमेर. अलवर गेट थाना क्षेत्र में 11 दिसंबर को हुए दोहरे हत्याकांड में पुलिस की जांच नतीजे के करीब है। हत्यारे के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस उसके खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है।

पुलिस के अनुसार प्रकाश रोड निवासी वृद्ध तुलसीराम कुशवाह और पत्नी कृष्णा की हत्या की जांच परिवार के लोगों और करीबी रिश्तेदारों के इर्द गिर्द है। संपत्ति और एफडी की राशि के विवाद के कारण शक की सुई मृतक के पुत्र महेशकुमार, ओमप्रकाश और दामाद ताराचंद की तरफ है। जांच में खुलासा हुआ है कि तुलसीराम, उसकी पत्नी और छोटा बेटा किशोर उर्फ ओमप्रकाश प्रकाश रोड स्थित जिस मकान में रहते थे, वह विवादित था।

मकान मालकिन भगवतीदेवी ने वसीयत महेश के नाम की थी। करीब दो साल से महेश अलग रह रहा है। तुलसीराम द्वारा दामाद ताराचंद और बेटी के लिए गुर्जर धरती इलाके में करीब तीन लाख रुपए में जमीन खरीद के मसले पर महेश का माता-पिता से झगड़ा होने की पुष्टि हुई है।

घटना के आठ दिन पहले महेश और पत्नी का माता-पिता के साथ झगड़े की चश्मदीद महिला ने पुलिस को दिए बयान में जान से मारने की धमकी का जिक्र किया है। जांच में सामने आया कि दस दिसंबर की रात करीब साढ़े दस से बारह बजे के बीच महेश दो अन्य लोगों के साथ मृतकों के घर के आस-पास देखा गया था।

पुलिस ने मृतक और महेश के फोन की कॉल हिस्ट्री की जांच की, इसमें महेश के बयान झूठे पाए गए। इधर छोटे बेटे किशोर उर्फ ओमप्रकाश के घटना के दौरान आगरा में रिश्तेदार के घर पर होने की पुष्टि हो गई। वह एक दिसंबर को शहर से बाहर था। पुलिस ने महेश और उसके बहनोई ताराचंद के बीच अनबन को भी जांच बिंदू बनाया। महेश के कारोबार में ताराचंद हिस्सेदार था। पुलिस ने ताराचंद को भी जांच के घेरे में लिया था।

तफ्तीश नतीजे के करीब पहुंच गई है। साक्ष्य और गवाह जुटाए जा रहे हैं। स्पेशल टीम जांच कर रही है।
-आनंद श्रीवास्तव,पुलिस अधीक्षक

बेटा प्राइम सस्पेक्ट >>
>> महेश कुमार प्राइम सस्पेक्ट है, क्योंकि वह वारदात की रात मृतकों के घर के आस-पास मौजूद था।
>> वारदात की रात करीब ढाई बजे महेश कचहरी रोड स्थित दुकान के पास कोरियर संर्विस का काम करने वाले परिचित के पास बदहवास हालत में गया था। वह रात भर उसकी दुकान में सोया था।
>> मृतकों के नाम साढ़े छह लाख की एफडी का भुगतान लेने के लिए महेश मुख्य डाकघर पहुंच गया था। एफडी का भुगतान लेने के लिए उसका छोटा भाई किशोर अधिकृत है। महेश ने खुद को किशोर बताकर फार्म लिय, लेकिन पोल खुल गई।





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