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यूआइटी से 136 सर्वे फार्म गायब

अजमेर. नगर सुधार न्यास से कच्ची बस्ती में नियमन के लिए किए गए 136 सर्वे फार्म गायब हो गए हैं। फार्म नहीं मिलने और सर्वे सूची पर अफसरों के हस्ताक्षर नहीं होने की वजह से अभी तक कच्ची बस्तियों के नियमन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

यूआइटी ने नियमन करने के लिए अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली कच्ची बस्तियों का सर्वे कराया था। न्यास ने करीब 436 आवासों को नियमन के लायक माना था। इस बीच राजस्थान हाइकोर्ट ने कच्ची बस्तियों में नियमन करने पर रोक लगा दी थी। यूआइटी ने कोर्ट की रोक की वजह से सर्वे फार्र्मो को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

जल्दबाजी में न्यास ने सर्वे कराने वाले बाबू और अफसरों से सर्वे सूची पर हस्ताक्षर तक नहीं कराए। अदालत ने करीब एक साल बाद कच्ची बस्ती के नियमन पर लगाई रोक हटा ली। सरकार ने चुनावी वर्ष की वजह से सभी निकायों को प्राथमिकता के आधार पर कच्ची बस्तियों के नियमन करने के निर्देश दिए थे।

न्यास ने नियमन करने के लिए सर्वे प्रपत्रों को निकाला तो 136 प्रपत्र नहीं मिले। प्रपत्र नहीं मिलने से बाबूओं में खबली मच गई। इधर कलेक्टर ने सर्वे सूची पर साइन करने से इनकार कर दिया। न्यास के उप सचिव चुन्नीलाल सैनी ने सचिव को सभी तथ्यों से अवगत करा दिया है। न्यास अब सूची पर तत्कालीन अफसर के हस्ताक्षर कराने के प्रयास कर रहा है। इस संबंध में उप सचिव ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

फिर भी नहीं होंगे नियमन

सर्वे सूची पर अफसर और बाबूओं के हस्ताक्षर होने के बाद भी नियमन नहीं हो पाएंगे। सरकार ने कच्ची बस्तियों में 110 वर्गगज के कब्जों का नियमन करने के निर्देश दिए हैं।

न्यास द्वारा किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि अधिकांश लोगों ने 200 से 300 वर्गगज तक भूमि पर कब्जा कर रखा है। इसके चलते न्यास को नियमन करने में कठिनाई आएगी।





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