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उम्मीद ही आमद में बाधा

चंडीगढ़नई आमद शुरू होने के बाद भी मंडियों में गेहूं के भाव कम नहीं हो रहे हैं। केंद्र द्वारा गेहूं का एक हजार रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य भी किसानों को फसल मंडी में लाने के लिए प्रेरित नहीं कर रहा है। नए गेहूं का खुले बाजार में भाव 1030-1040 प्रति क्वि. तक है जबकि पुराना गेहूं अभी 1090-1100 रु./क्विंटल से अधिक है। फसल आने पर भाव कई बार समर्थन मूल्य से नीचे चले जाते हैं। गेहूं के ऊंचे भाव रहने से किसानों ने मंडियों में फसल लाने की प्रक्रिया धीमी कर रखी है।

1150 रुपए तक रहे भाव: संगरूर के आढ़ती जय किशन बंसल के अनुसार किसानों ने इस साल भी 1150 रुपए तक के भाव देखे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकारी खरीद बंद होते ही बाजार में फिर तेजी आएगी। ऐसे में वे भले ही कुछ खर्च निकालने के लिए फसल का कुछ हिस्सा मंडी में ले आएं लेकिन वे अपनी पूरी फसल मंडी में नहीं लाएंगे। इन परिस्थितियों में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है।

सरकार खरीद के लक्ष्य से 15-20 फीसदी पीछे रह गई तो यह करीब 15 लाख टन के करीब होगा। बीते साल भी किसानों ने शुरूआत में कम फसल मंडी में बेची थी जबकि बाद में भाव अच्छा मिला तो वे बाकी फसल भी मंडी में ले आए। इस बार ऐसे ही हालात बन रहे हैं। किसान यूनियन पहले से ही किसानों को फसल मंडी में न लाने की अपील कर रही है, इनका असर मंडी में गेहूं की आवक पर पड़ रहा है।

अभी भी बोनस की उम्मीद

किसानों को यह भी महसूस हो रहा है कि अगर केंद्र सरकार अपनी दिक्कतों के चलते गेहूं का समर्थन मूल्य 700 रुपए से बढ़ा कर 1000 रुपए कर सकती है तो वह भविष्य में 100-150 रुपए बतौर बोनस भी दे सकती है। अतीत में सरकार खरीद लक्ष्य पूरे होते न देख 50-100 रुपए का बोनस देती रही है, किसानों को इस बार भी ऐसी उम्मीद है। वे फसल रोक कर रखना चाहते हैं और इससे मंडियों में आमद कम होना लाजिमी है।





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