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सख्ती से दूर रहेंगी कंपनियां

चंडीगढ़ठंडे अप्रैल के चलते गेहूं की आमद भी अभी ठंडी है। पंजाब की मंडियों में अभी मात्र 11 हजार मीट्रिक टन गेहूं ही आया है। खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर चिंतित केंद्र सरकार की नजरें बड़ी निजी कंपनियों पर लगी हैं। लेकिन पंजाब सरकार द्वारा पहले से ही खाद्यान्न पर लिए जा रहे भारी टैक्स को और बढ़ाने से संभावना है कि निजी कंपनियां इस बार गेहूं खरीद से दूर ही रहेंगी।

पंजाब के फूड एंड सप्लाई सचिव आरपीएस पवार का कहना है कि केंद्र द्वारा इस बार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 33 फीसदी वृद्धि करने से किसानों को फसल का अच्छा भाव मिल रहा है लिहाजा वे फसल स्टोर करने की बजाय मंडियों में लाने की पहल करेंगे। मंडी टैक्स और खरीद के लिए रिटर्न की पाबंदी भी निजी कंपनियों को मंडियों से दूर रखेगी। मुख्य सचिव आर.आई. सिंह ने कहा कि सीधी खरीद पर नजर रखी जाएगी। निजी कंपनियों कोनियंत्रण में लाने के लिए ही केंद्र ने गेहूं खरीद नियमित करने की योजना तैयार की है।

केंद्रीय फूड एंड सप्लाई विभाग के अतिरिक्त सचिव शराज हुसैन का कहना है कि पिछले साल 25 हजार मीट्रिक टन खरीद तक निजी कंपनियों को छूट थी अब इसे दस हजार मीट्रिक टन किया गया है। गेहूं खरीदने पर उन्हें रिटर्न फाइल करनी होगी जिसमें न केवल खरीद के लिए आय स्रोत बल्कि गेहूं कहां रखा गया है, इसकी जानकारी भी देनी होगी।

इसका मतलब यह नहीं है कि उन पर गेहूं खरीद की पाबंदी है। कृषि मंत्री शरद पवार का भी मानना है कि पंजाब-हरियाणा में भारी टैक्सों के कारण इस बार कंपनियों का ध्यान पश्चिमी यूपी, गुजरात और मध्यप्रदेश की ओर है, क्योंकि यहां से खरीद करके गेहूं को दक्षिण भारत में पहुंचाने पर उनका ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम पड़ता है।





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