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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) का गेहूं खरीद टारगेट अब राज्य सरकारों पर टिका है। एफसीआई के क्षेत्रीय महाप्रबंधक अरुण कुमार ने बताया कि हरियाणा-पंजाब सरकारों से आग्रह किया गया था कि वे खेत से ही गेहूं की बिक्री को रोकने के पुख्ता इंतजाम करें क्योंकि इससे प्रदेश सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। एफसीआई के अधिकारी मानते हैं गेहूं की सीधी बिक्री थम जाती है तो उनके टारगेट पूरे होंगे क्योंकि तब मंडी टैक्स से गेहूं निजी कपंनियों को महंगा पड़ेगा।
दूर हुआ भ्रम: गेहूं खरीद पर निजी कंपनियों का भ्रम दूर हो गया है। केंद्रीय कृषि खाद्य आपूर्ति मंत्री शरद पवार ने चंडीगढ़ में साफ किया कि ऐसी कोई रोक थी ही नहीं। मंत्री के इस बयान से किसान व निजी खरीदार दोनों खुश हैं। निजी कंपनियां अधिक दाम पर गेहूं खरीद में जुट गई हैं। कंपनियां आढ़तियों के माध्यम से गेहूं खरीद रही हैं। यह दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से सौ से लेकर दो सौ रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा है।
दाम जहां अधिक वहीं बेचेंगे
किसान मोर्चा के सचिव राजबीर सिंह ने बताया कि जहां अधिक दाम मिलेगा, वहीं किसान गेहूं बेचेंगे। अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल समेत कई अन्य जगहों पर किसान निजी खरीदारों को गेहूं बेच रहे हैं। उनका अनुमान है कि 50 फीसदी तक गेहूं निजी क्षेत्र में बिक सकता है।
हमें उम्मीद है कि एफसीआई गेहूं खरीद का टारगेट पूरे कर लेगा। पिछले साल हरियाणा से 33.5 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार यह टारगेट 40 लाख टन हो गया है। गेहूं यदि मंडी में आया तो निश्चित ही सरकारी खरीद बढ़ेगी।
अरुण कुमार, जीएम रीजनल, एफसीआई