Vaama
Relationships Relationships रिश्ते-नाते.
नीति और रीना की दोस्ती स्कूल के समय से शुरू हुई थी। कॉलेज तक आते- आते दोस्ती और गहरी होती चली गई। लेक्चर में साथ जाना, कॉलेज में हो रहे आयोजनों में एकसाथ हिस्सा लेना। दोनों इतना साथ रहती थीं कि कॉलेज में उन्हें सीता-गीता के नाम से छेड़ा जाता था।
कॉलेज के बाद नौकरी भी दोनों की एक ही कम्पनी में लगी, जहां दोनों ने हुनर और दोस्ती दोनों को कायम रखा। जीवन के तकरीबन 23 साल दोनों ने साथ गुज़ारे। न कोई लड़ाई, न झगड़ा। हर सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ। कुछ समय बाद रीना की शादी हो गई और वह अपने ससुराल चली गई।
इसके बाद रीना और नीति का मेलमिलाप रस्मी होता गया। नीति के मुताबिक, रीना शादी के बाद बदल गई है। उससेमिलने में वो पहले वाली बात नहीं। आखिर क्यों? शादी के बाद नीति और रीना के प्यारभरे दोस्ताना सफर में क्यों विषमता आ गई? थोड़ी-सी समझदारी से काम लिया जाए तो, खुद ही इस बात का अहसास होगा दोस्ती कभी नहीं बदलती, परिस्थितियों के चलते, बस उसे निभाने का अंदाज़ बदल जाता है।
इसे निभाने के दोस्ताना तरीके-
समझें नज़रिया
किसी सहेली या दोस्त की शादी हुई नहीं कि दूसरे साथी ने मान लिया कि अब वो पहले वाली बात नहीं रहेगी। शादी के बाद वो भी बदल जाएगी और जब बदल जाएगी, तो दूरियां अपने आप आ जाएंगी। यह सोच ही दूरियों को बढ़ाने के लिए काफी है। आपके कदम अपने आप पीछे हट जाते हैं।
हम यह भूल जाते हैं कि उसकी शादी हो चुकी है। उस पर दोहरी ज़िम्मेदारी है-पति और नए परिवार की और दूसरी तरफ आपका जीवन है जहां अब भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। इन स्थितियों में उसके स्वभाव में थोड़ा अंतर आना ला़Êिामी है। बहुत ज़्यादा मिलना या बार-बार फोन कर घंटों बातें करना उसके लिए संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे समय एक अच्छे दोस्त के नाते उसकी मनोस्थिति और नज़रिए को समझें।
अपेक्षाएं रखें कम
दोस्ती टूटने की ज़्यादातर वजह पहले की तरह रखी गई अपेक्षाएं होती हैं। हम यही चाहते हैं कि वो हमसे पहले की तरह मिलें। लेकिन स्थितियां हमेशा समान नहीं होतीं। शादी के बाद जिस घर में वह गई है, वहां की परिस्थिति उसके मायके से निश्चित ही अलग होगी। यहां यह उम्मीद रखना कि वह आपको हर दूसरे दिन फोन करे या मदद के लिए हमेशा तैयार रहे, गलत होगा। वो यदि आपको फोन नहीं कर पा रही या नहीं मिल पा रही हो, तो आप खुद ही उससे संपर्क करें। मकसद तो बात करना ही है।
शिकवे-शिकायतों को करें दूर
किसी शादीशुदा दोस्त की शिकायत या बात अक्सर मिर्ची की तरह लग जाती है। और हम बात करना छोड़ देते हैं। नाराÊागी को दिल में दबाकर बैठने के बजाए साफ-साफ पूछ लें। इससे गलतफहमी दूर हो जाएगी। एक दोस्त के नज़रिए से सोचने पर आपको इस बात का खुद ही अहसास हो जाएगा कि वो दोस्त गलत नहीं है। हो सके, तो गलतियों को माफ करने की आदत डाल लें।