इंदौर. नए शिक्षा सत्र से यूनिवर्सिटी मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपेथी, यूनानी की परीक्षा प्रणाली बदल रही है। अब यहां मुंबई का परीक्षा मॉडल को अपनाया जाएगा।
जुलाई से लागू होने वाली परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए फायदेमंद रहेगी क्योंकि इसमें प्रश्न छोटे होंगे। पहले 15 नंबर का एक प्रश्न छूटने पर भी पूरे अंक कट जाते थे। कुलपति डॉ. भागीरथप्रसाद ने प्रश्न पत्र का प्रारूप बदलने और नए पैटर्न से परीक्षा कराने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडी के सदस्यों को भी कहा है। इसके बाद प्रश्न पत्र का प्रारूप बदलने की प्रक्रिया यूनिवर्सिटी शुरू करेगी। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
ऐसा होगा पैटर्न : नए परीक्षा पैटर्न में प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जाएगी और बड़े प्रश्नों के बजाय छोटे पूछे जाएंगे। इनके अंक भी कम होंगे लेकिन पूरे कोर्स को ध्यान में रखकर प्रश्न बनाए जाएंगे।
प्रेक्टिकल में फेल होने पर कॉलेज न ले फीस : कुलपति ने सेमेस्टर रुकने के दौरान फीस को लेकर छात्रों और कॉलेजों के विवाद का निपटारा कर दिया। अब अगर कोई छात्र प्रेक्टिल परीक्षा में फेल हो जाता है और वह लिखित परीक्षा में पास है तो उससे कॉलेज पूरे सेमेस्टर की फीस नहीं ले सकेंगे। छात्र के प्रेक्टिकल में फेल होने पर यह माना जाएगा की कॉलेज में कुछ पढ़ाया नहीं जाता।
75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी : इसके साथ ही यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि जिन छात्रों की उपस्थिति ७५ प्रतिशत हो उन्हें ही परीक्षा में बैठाएं।
कितनों को फायदा : नए पैटर्न से मेडिकल के १४क्क्, डेंटल के १४क्क् होम्योपैथी के १क्क्क्, आयुर्वेद के ६क्क् और यूनानी के 40 छात्रों को फायदा होगा।
अब तक ऐसे होती थी
एमबीबीएस : लिखित परीक्षा में एक प्रोफ में दो पेपर होते हैं। एक पेपर में दोनों के मिलाकर 16 प्रश्न होते हैं। इनमें कुल 80 नंबर मिलते हैं। 20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन होता है।
डेंटल : फस्र्ट ईयर में तीन पेपर होते हैं। इसमें हर पेपर में 6 प्रश्न पूछे जाते हैं। एक प्रश्न 15 नंबर का होता है। दो प्रश्न शार्ट नोट के पूछे जाते हैं।