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आग नकली, खामियां असली

इंदौर. ट्रेजर आईलैंड में बुधवार सुबह आग लगी और धुंआ भरने से 14 लोग बेसुध हो गए। मॉल में मौजूद आठ सौ लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे। मॉल के फायर सेफ्टी अमले और और फायर ब्रिगेड ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया और भीषण हादसा टल गया। यह सब हुआ मॉल के सुरक्षा इंतजामों को परखने के लिए की गई मॉक ड्रिल में। इस नकली आग में ही अनेक असली खामियां उजागर हो गईं?

सुबह 11 बजे मॉल में ज्यादातर शोरूम, रेस्टारेंट व दुकानें खुल चुकी थीं। लोगों की आवाजाही शुरू हुई ही थी कि तीसरी मंजिल से धुआं उठा और अलार्मिग फायर बेल बजने लगी। इस पर लोग घबराए और सुरक्षाकर्मी दौड़-दौड़कर उन्हें बाहर निकलने का बोलने लगे। इस बीच उद्घोषणा भी होने लगी कि लोग फटाफट बाहर आ जाएं। कोई रेस्टोरेंट में अधूरी प्लेट छोड़कर भागा तो कोई शोरूम खुला छोड़कर। तभी बिजली गुल हुई और एस्केलेटर बंद हो गए।

उधर, मॉल का फायर अमला तीसरी मंजिल पर चिली रिलेक्स रेस्टारेंट पहुंचा। वहां आग और धुएं के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। दम घुटने से कई लोग इधर-उधर पड़े थे। कुछ को स्ट्रेचर पर और कुछ को कंधे पर डालकर सुरक्षाकर्मी नीचे ले गए। उसी मंजिल के दूसरे हिस्से में फंसी महिलाएं रोने लगीं। उन्हें हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म से उतारा। इस बीच पहुंचे फायर ब्रिगेड दल ने दूसरी मंजिल पर बेसुध रतनलाल, विष्णु यादव और गार्ड योगेंद्र यादव को रस्सी से बांधकर नीचे उतारा।

हरनाथसिंह रघुवंशी व जगदीश ओसवाल फायर सूट पहनकर रेस्टोरेंट के किचन में पहुंचे। वहां नली फटने से लीक हो रही गैस पर पानी मारा और कनेक्शन बंद किया। तब तक कलेक्टर विवेक अग्रवाल, एसपी अंशुमान यादव, एडीएम रमेश भंडारी सहित कई अफसर पहुंचे। फिर पंजाब अरोडवंशीय धर्मशाला में अस्थायी क्लिनिक लगाया जहां डॉक्टर्स ने घायलों का इलाज शुरू किया।

बाहर भी अफरा-तफरी :
मॉल से लोग बाहर निकले तो एमजी रोड का ट्रैफिक अस्त-व्यस्त हो गया। तब एक ओर का ट्रैफिक कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। मॉल परिसर से वाहन चालक पीछे के रास्ते से निकले।

गंभीर खामियां
- घायलों को तीसरी मंजिल से उतारने वाली रस्सी छोटी पड़ गई। तब दूसरी मंजिल पर लाकर उतारा।
- हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की क्षमता और स्पीड बहुत कम है।
- मॉल प्रबंधन और फायर ब्रिगेड के पास नेट नहीं थी।
- सबसे संवेदनशील तीनों तलघर की पार्किग है। आमतौर पर ऐसी ही जगह वाहनों में विस्फोटक रखे जाते हैं। वहां के सुरक्षा इंतजाम भी परखना चाहिए।
- आग की चेतावनी देने के लिए लगे ध्वनि विस्तारकों की आवाज बहुत धीमी थी जिससे लोग एकबारगी तो कुछ समझ ही नहीं पाए।
- इमरजेंसी दरवाजे भी एक ओर के ही खोले गए।
- मेन गेट पर भी आग की जानकारी देने वाला कोई नहीं था।





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