इंदौर. आईआईटी दिल्ली ने इंदौर विकास प्राधिकरण को एबी रोड पर प्रेस कॉम्प्लेक्स से गीता भवन चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के फीजिबिलिटी सर्वे से ही इंकार कर दिया है। उसका तर्क है बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) कॉरिडोर (चौड़ी सड़क) बन जाने के बाद यह उपयोगी नहीं रहेगा।
प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर पी.के. मिस्त्री ने इसकी पुष्टि की और बताया अब एलिवेटेड कॉरिडोर का सर्वे किसी और कंसल्टेंट से करवाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव बुलाएंगे। सर्वे के बाद ही एलिवेटेड कॉरिडोर की उपयोगिता तय हो पाएगी।
लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले साल 11 अगस्त को शहर के विकास कार्यो की समीक्षा बैठक में तीन भुजा वाले कॉरिडोर के सर्वे का कहा था। तब प्राधिकरण ने आईआईटी को चुना क्योंकि एबी रोड बीआरटीएस कॉरिडोर की डिजाइन भी वहीं की प्रो. गीतम तिवारी की मदद से बनी है। प्राधिकरण को उम्मीद थी आईआईटी एलिवेटेड कॉरिडोर और बीआरटीएस में तालमेल बैठाने के बारे में बेहतर बता पाएगा।
इधर, मई तक निरंजनपुर से एलआईजी और राजीव गांधी प्रतिमा से नौलखा तक बीआरटीएस कॉरिडोर पूरा करने का लक्ष्य है। उसके बाद एलआईजी तिराहे से नौलखा चौराहा का काम शुरू होगा। उससे पहले एलिवेटेड कॉरिडोर की उपयोगिता का फैसला जरूरी है।
सीईएस ने बताई थी जरूरत
करीब पांच साल पहले केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने कंसल्टिंग इंजीनियरिंग सर्विसेस (सीईएस) से शहर का ट्रैफिक सर्वे करवाया था। उसकी रिपोर्ट में पलासिया चौराहा के आसपास फ्लायओवर या ग्रेड सेपरेटर और तिलकनगर से एमजी रोड होकर राजवाड़ा तक एक मेट्रो कॉरिडोर की कल्पना की थी। तब एबी रोड पर बीआरटीएस का प्रस्ताव नहीं था। हालांकि उसके प्रस्तावों पर अमल नहीं किया गया।
नहीं बन पाया ग्रेड सेपरेटर
नगर निगम ने भी समय-समय पर ग्रेड सेपरेटर बनाने की घोषणाएं की लेकिन बना नहीं। कैलाश विजयवर्गीय के महापौर रहते मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह से चार भुजाओं वाले ब्रिज का शिलान्यास कराया गया। डॉ. उमाशशि शर्मा के आने पर तीन भुजा का बनाने की बात चली।