इंदौर.
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए घोषित छठे वेतन आयोग की सिफारिशें यदि प्रदेश सरकार भी जस की तस मान ले तो प्रदेश में नोटों की बारिश होगी। यदि सरकार बढ़ी हुई राशि का आधा हिस्सा अपने पास जमा भी रखती है तो भी राज्य के पेंशनर्स और केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाली राशि मिलकर बाजार में पैसों की भरमार कर देगी।
सरकार यदि कर्मचारियों को पूरा लाभ नकद देती है तो साल के अंत तक एक आकलन के अनुसार बाजार में कम से कम पांच हजार करोड़ रुपए आने की संभावना है। चतुर्थ श्रेणी स्तर के कर्मचारी को औसत 1300 रुपए और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नौ हजार रुपए तक का मासिक लाभ मिलने का अनुमान है। इससे सरकारी खजाने पर करीब 196 करोड़ रुपए मासिक का भार पड़ेगा।
वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार जनवरी 2006 से यह लाभ अगर अप्रैल महीने में दिया जाता है तो 26 महीने का एरियर भी देना होगा। इस तरह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ३3 हजार और वरिष्ठ अफसरों को दो लाख 34 हजार रुपए मिलेंगे। यानी सरकार को पांच हजार 72 करोड़ रुपए कर्मचारियों में बांटना पड़ेंगे।
नजरें टिकी हैं राज्य वेतन आयोग पर >>
हालांकि प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठन सिफारिशों को लेकर ज्यादा आशावादी नहीं है। उन्हें आशंका है कि कहीं सरकार उनके सपनों को चकनाचूर न कर दें। प्रदेश सरकार ने बजट में ही अलग से राज्य वेतन आयोग का गठन भी कर दिया है जो दिसंबर महीने में रिपोर्ट पेश करेगा। इससे कर्मचारियों की आशंका को बल मिल रहा है। हालांकि प्रदेश में पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशें लगभग पूरी तरह मान ली गई थीं। इस वजह से कहीं न कहीं उम्मीद का दीया टिमटिमा रहा है।
पेंशनरों के चेहरे भी खिलेंगे >>
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें प्रदेश में लागू होने की उम्मीद से राज्य के करीब ढाई लाख पेंशनर्स के भी चेहरे खिले हुए हैं। इनके लागू होने के बाद कर्मचारियों से आधा लाभ उन्हें भी मिलेगा। सरकार को मासिक पेंशन पर भी करीब 70 करोड़ रुपए अतिरिक्त देना पड़ेंगे।
दिसंबर तक करें इंतजार >>
छठे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार के लिए ही राज्य वेतन आयोग गठित किया गया है। यदि केंद्रीय आयोग की सभी सिफारिशें अनुकूल लगीं तो उसे वैसा ही अपनाया जा सकता है। टोकन अमाउंट के रूप में इस बार वेतन-भत्तों के बजट में बढ़ोतरी भी कर दी गई है। जरूरत पड़ी तो पूरक बजट में भी प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि दिसंबर में रिपोर्ट आने के बाद उस पर विचार के लिए थोड़ा समय लगेगा।
- राघवजी, वित्त मंत्री मप्र
अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा >>
यदि प्रदेश सरकार सिफारिशें मानकर कर्मचारियों को नकद लाभ देती है और मार्केट में इतना पैसा आता है तो मांग पैदा होगी, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। अमेरिकी मंदी का असर भी कम हो सकता है। यदि सरकार कुछ हिस्सा भविष्य निधि में ट्रांसफर कर दे तो उसे कुछ फौरी राहत मिल सकती है। परंतु यदि सरकार सिफारिशों का लाभ नहीं देगी तो कर्मचारी अन्य क्षेत्रों का रुख कर सकते हैं जिससे प्रदेश को नुकसान ही होगा।
- प्रो. गणोश कावड़िया, विभागाध्यक्ष स्कूल ऑफ इकानॉमिक्स
पहले केंद्रीय कर्मचारियों को तो मिले >>
अभी तो केंद्र सरकार अपने ही कर्मचारियों को आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं दे पा रही है। वहां नया वेतनमान मिलते ही कर्मचारी संगठन राज्य में संघर्ष शुरू कर देंगे। वैसे पांचवें वेतनमान का अनुभव अच्छा है। इस वजह से नए वेतनमान से काफी उम्मीदे हैं।
- एल.एन. कैलासिया, अध्यक्ष मप्र तृतीय श्रेणी शा. कर्म. संघ